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Kullu News: बारिश के बाद मटमैला पानी आने से गाद से भर जाते हैं टैंक
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 11 Jan 2026 10:33 PM IST
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कुल्लू के खलाड़ा नाला में पानी का टैंक।-संवाद
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बरसात में बारिश के बाद कुल्लू शहर में कुछ क्षेत्रों में आती है परेशानी
खड्ड, नालों पर अधिकतर पेयजल योजनाओं में नहीं पुख्ता इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की पेयजल योजनाओं के अधिकतर स्रोत नदी, खड्ड और नाले हैं। बारिश के बाद मटमैला पानी आता है। इससे पेयजल टैंकों में गाद भर जाती है। यह समस्या कुल्लू में बरसात के समय सबसे अधिक आती है।
इतना ही नहीं, पेयजल टैंकों में गाद भरने के बाद दो-तीन दिनों के लिए कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
खड्ड, नालों पर आधारित पेयजल योजनाओं में विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कुल्लू शहर के लिए पेयजल की आपूर्ति शेताफाट स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से की जाती है। शहर को खलाड़ानाला और सरवरी खड्ड से पेयजल आपूर्ति की जाती है। दोनों प्लांट की क्षमता 82 लाख लीटर है। कुल्लू शहर की चौबीस घंटे पेयजल आपूर्ति योजना इन्हीं पर आधारित है लेकिन भारी बारिश होने पर पेयजल टैंकों में गाद भर जाती है। इस बाद टैंकों को साफ कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आपूर्ति करनी पड़ती है। दूसरी ओर, खराहल, पार्वती घाटी, बंजार, सैंज, बंजार और आनी क्षेत्र में भी अधिकतर पेयजल योजनाओं के स्रोत बहते नाले हैं। बारिश होने के बाद यहां भी मटमैला पानी आता है।
गर्मियों के दौरान इस मटमैले पानी लोगों का स्वास्थ्य गंभीर बना सकता है। हालांकि विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि पेयजल को फिल्टिरिंग और शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही उपभोक्ताओं को दिया जाता है। उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता अमित कुमार का कहना है कि कुल्लू शहर में लोगों को स्वच्छ मुहैया करवाया जा रहा है।
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विभाग की ओर से जो विभिन्न जगहों से पानी के सैंपल लिए जाते हैं। जब इनकी जांच हो जाती है तो इनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। इससे लोगों को पता चलेगा कि पानी पीने योग्य है या नहीं। पेयजल को लेकर किसी तरह कोताही नहीं होनी चाहिए। - यशपाल नेगी, कुल्लू
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पेयजल भंडारण टैंकों और शहर में आने वाले टैंकों की सफाई भले ही विभाग की ओर से नियमित अंतराल के बाद की जाती हो। पेयजल स्रोतों की भी नियमित अंतराल के बाद सफाई के साथ जांच होनी चाहिए जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल मिले। - मेहर चंद,--
बरसात में पेयजल की गुणवत्ता पर काफी संशय रहता है। भारी बारिश के बाद कई इलाकों में मटमैला पानी आता है। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि आम दिनों में इस तरह की परेशानी नही है। पेयजल टैंकों के साथ स्रोतों की सफाई का उचित प्रबंध किया जाए। - भाग चंद ठाकुर, कुल्लू
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खड्ड और नालों को दूषित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कुल्लू में मनाली से लेकर बजौरा तक ब्यास किनारे अकसर कई जगहों पर लोग शौच करते हैं जिससे नदी-नालों के पानी में गंदगी घुल जाती है। लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।
- गुरदयाल सिंह, कुल्लू
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खड्ड, नालों पर अधिकतर पेयजल योजनाओं में नहीं पुख्ता इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की पेयजल योजनाओं के अधिकतर स्रोत नदी, खड्ड और नाले हैं। बारिश के बाद मटमैला पानी आता है। इससे पेयजल टैंकों में गाद भर जाती है। यह समस्या कुल्लू में बरसात के समय सबसे अधिक आती है।
इतना ही नहीं, पेयजल टैंकों में गाद भरने के बाद दो-तीन दिनों के लिए कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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खड्ड, नालों पर आधारित पेयजल योजनाओं में विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कुल्लू शहर के लिए पेयजल की आपूर्ति शेताफाट स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से की जाती है। शहर को खलाड़ानाला और सरवरी खड्ड से पेयजल आपूर्ति की जाती है। दोनों प्लांट की क्षमता 82 लाख लीटर है। कुल्लू शहर की चौबीस घंटे पेयजल आपूर्ति योजना इन्हीं पर आधारित है लेकिन भारी बारिश होने पर पेयजल टैंकों में गाद भर जाती है। इस बाद टैंकों को साफ कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आपूर्ति करनी पड़ती है। दूसरी ओर, खराहल, पार्वती घाटी, बंजार, सैंज, बंजार और आनी क्षेत्र में भी अधिकतर पेयजल योजनाओं के स्रोत बहते नाले हैं। बारिश होने के बाद यहां भी मटमैला पानी आता है।
गर्मियों के दौरान इस मटमैले पानी लोगों का स्वास्थ्य गंभीर बना सकता है। हालांकि विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि पेयजल को फिल्टिरिंग और शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही उपभोक्ताओं को दिया जाता है। उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता अमित कुमार का कहना है कि कुल्लू शहर में लोगों को स्वच्छ मुहैया करवाया जा रहा है।
विभाग की ओर से जो विभिन्न जगहों से पानी के सैंपल लिए जाते हैं। जब इनकी जांच हो जाती है तो इनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। इससे लोगों को पता चलेगा कि पानी पीने योग्य है या नहीं। पेयजल को लेकर किसी तरह कोताही नहीं होनी चाहिए। - यशपाल नेगी, कुल्लू
पेयजल भंडारण टैंकों और शहर में आने वाले टैंकों की सफाई भले ही विभाग की ओर से नियमित अंतराल के बाद की जाती हो। पेयजल स्रोतों की भी नियमित अंतराल के बाद सफाई के साथ जांच होनी चाहिए जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल मिले। - मेहर चंद,
बरसात में पेयजल की गुणवत्ता पर काफी संशय रहता है। भारी बारिश के बाद कई इलाकों में मटमैला पानी आता है। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि आम दिनों में इस तरह की परेशानी नही है। पेयजल टैंकों के साथ स्रोतों की सफाई का उचित प्रबंध किया जाए। - भाग चंद ठाकुर, कुल्लू
खड्ड और नालों को दूषित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कुल्लू में मनाली से लेकर बजौरा तक ब्यास किनारे अकसर कई जगहों पर लोग शौच करते हैं जिससे नदी-नालों के पानी में गंदगी घुल जाती है। लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।
- गुरदयाल सिंह, कुल्लू