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Kullu News: प्रोजेक्ट के लिए दी जमीन, न मिला रोजगार न ही मुआवजा
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सैंज (कुल्लू)। घाटी में 1420 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बिजली परियोजनाओं से देश के कई राज्य रोशन हो रहे हैं। प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले प्रभावित आज भी हकों के लिए लड़ रहे हैं।
इन परियोजनाओं के लिए उन्होंने अपनी जमीन, घर और अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया। उसके बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल पाया है और न ही उचित मुआवजा। 606 परिवार ऐसे हैं जो मुआवजा और अन्य तमाम सुविधाओं का हक रखते हैं लेकिन आनन-फानन में उन्हें आरआर प्लान का लाॅलीपॉप थमाया गया। आज तक वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन अभी तक हक नहीं मिल पाया। ऐसे में प्रभावित परेशान हैं।
सैंज में वर्ष 1999 से बिजली परियोजना बनाने का दौर शुरू हुआ था। बिजली परियोजनाओं के लिए कंपनियां कार्य कर रही हैं। कंपनी में हालांकि लोगों को काम पर रखने का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों को इसकी भी शिकायत है कि बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय लोगों की भर्ती के लिए कंपनी के अधिकारी कई पेंच फंसा रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से इन सभी प्रभावित परिवारों के लिए अनेक रास्ते निकाले गए लेकिन प्रभावित परिवार अभी भी सरकार और परियोजना की ओर से निकाले गए रास्तों से खुश नहीं है। कई बार प्रभावितों की सरकार और प्रोजेक्ट के अधिकारियों से बातचीत भी हुई, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
....
आरआर प्लान के तहत आने वाले 606 लोगों में से अधिकतर को फायदा दिया जा चुका है। अब मात्र 75 लोग शेष बचे हैं। उन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है। अगर आवेदन करते हैं तो उन्हें भी इसका फायदा दिया जाएगा।
-रंजीत सिंह, परियोजना प्रमुख पार्वती चरण दो
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इन परियोजनाओं के लिए उन्होंने अपनी जमीन, घर और अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया। उसके बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल पाया है और न ही उचित मुआवजा। 606 परिवार ऐसे हैं जो मुआवजा और अन्य तमाम सुविधाओं का हक रखते हैं लेकिन आनन-फानन में उन्हें आरआर प्लान का लाॅलीपॉप थमाया गया। आज तक वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन अभी तक हक नहीं मिल पाया। ऐसे में प्रभावित परेशान हैं।
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सैंज में वर्ष 1999 से बिजली परियोजना बनाने का दौर शुरू हुआ था। बिजली परियोजनाओं के लिए कंपनियां कार्य कर रही हैं। कंपनी में हालांकि लोगों को काम पर रखने का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों को इसकी भी शिकायत है कि बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय लोगों की भर्ती के लिए कंपनी के अधिकारी कई पेंच फंसा रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से इन सभी प्रभावित परिवारों के लिए अनेक रास्ते निकाले गए लेकिन प्रभावित परिवार अभी भी सरकार और परियोजना की ओर से निकाले गए रास्तों से खुश नहीं है। कई बार प्रभावितों की सरकार और प्रोजेक्ट के अधिकारियों से बातचीत भी हुई, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
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आरआर प्लान के तहत आने वाले 606 लोगों में से अधिकतर को फायदा दिया जा चुका है। अब मात्र 75 लोग शेष बचे हैं। उन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है। अगर आवेदन करते हैं तो उन्हें भी इसका फायदा दिया जाएगा।
-रंजीत सिंह, परियोजना प्रमुख पार्वती चरण दो