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Kullu News: बर्फ के लिए मंदिरों और मठों में गूंज रही प्रार्थना
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 11 Jan 2026 10:24 PM IST
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गौशाल गांव के लोगों ने गुरु घंटाल मठ में की अच्छी बर्फबारी की कामना
जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में बर्फबारी न होने से फसलों पर गहराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में इस बार सर्दी का मौसम बिना बर्फबारी ही गुजरता नजर आ रहा है। इससे न केवल जनजीवन, बल्कि कृषि सीजन पर भी संकट गहराया लगा है।
आमतौर पर सर्दियों में बर्फ की मोटी चादर घाटी को ढक लेती है। इस बार सूनीं पहाड़ियां और खाली खेत किसानों की बढ़ती चिंता बयां कर रहे हैं। मौसम की बेरुखी के बीच अब घाटीवासियों ने उम्मीद की डोर आस्था से बांध ली है। बर्फबारी की कामना लेकर ग्रामीण घाटी के प्राचीन गुरु घंटाल मठ पहुंचे। यहां नगाड़ों की गूंज के बीच अच्छी बर्फबारी और खुशहाली के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई।
बर्फबारी नहीं होने से आगामी कृषि सीजन को लेकर जनजातीय किसानों की चिंता बढ़ गई है। रविवार को गौशाल गांव के ग्रामीण घाटी के सबसे पुराने गुरु घंटाल मठ पहुंचे। चंद्रभागा नदी के संगम के ठीक ऊपर स्थित प्राचीन मठ में ग्रामीणों ने नगाड़ा बजाकर बर्फबारी के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान अच्छी बर्फबारी और घाटी में खुशहाली की कामना की गई। गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग रंजीत रोकपा भी मठ पहुंचे। उन्होंने कहा कि लाहौल घाटी की खेती और जल स्रोत पूरी तरह बर्फबारी पर निर्भर हैं। अगर समय पर बर्फ नहीं गिरी तो आने वाले सीजन में खेती पर इसका गहरा असर पड़ेगा। ग्रामीणों में दिनेश कटोच और सचिन ने कहा कि बर्फबारी से न केवल खेतों के लिए नमी मिलती है बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों का भी पुनर्भरण होता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम करवट लेगा और घाटी में बर्फबारी होगी।
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जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में बर्फबारी न होने से फसलों पर गहराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में इस बार सर्दी का मौसम बिना बर्फबारी ही गुजरता नजर आ रहा है। इससे न केवल जनजीवन, बल्कि कृषि सीजन पर भी संकट गहराया लगा है।
आमतौर पर सर्दियों में बर्फ की मोटी चादर घाटी को ढक लेती है। इस बार सूनीं पहाड़ियां और खाली खेत किसानों की बढ़ती चिंता बयां कर रहे हैं। मौसम की बेरुखी के बीच अब घाटीवासियों ने उम्मीद की डोर आस्था से बांध ली है। बर्फबारी की कामना लेकर ग्रामीण घाटी के प्राचीन गुरु घंटाल मठ पहुंचे। यहां नगाड़ों की गूंज के बीच अच्छी बर्फबारी और खुशहाली के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई।
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बर्फबारी नहीं होने से आगामी कृषि सीजन को लेकर जनजातीय किसानों की चिंता बढ़ गई है। रविवार को गौशाल गांव के ग्रामीण घाटी के सबसे पुराने गुरु घंटाल मठ पहुंचे। चंद्रभागा नदी के संगम के ठीक ऊपर स्थित प्राचीन मठ में ग्रामीणों ने नगाड़ा बजाकर बर्फबारी के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान अच्छी बर्फबारी और घाटी में खुशहाली की कामना की गई। गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग रंजीत रोकपा भी मठ पहुंचे। उन्होंने कहा कि लाहौल घाटी की खेती और जल स्रोत पूरी तरह बर्फबारी पर निर्भर हैं। अगर समय पर बर्फ नहीं गिरी तो आने वाले सीजन में खेती पर इसका गहरा असर पड़ेगा। ग्रामीणों में दिनेश कटोच और सचिन ने कहा कि बर्फबारी से न केवल खेतों के लिए नमी मिलती है बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों का भी पुनर्भरण होता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम करवट लेगा और घाटी में बर्फबारी होगी।