{"_id":"6a4554020e53a11b1b0918b9","slug":"the-tradition-of-ruhani-using-red-rice-was-observed-in-honor-of-the-deity-vasuki-nag-kullu-news-c-89-1-ssml1015-180310-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: देवता वासुकी नाग के सम्मान में निभाई लाल चावल की रूहणी की परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: देवता वासुकी नाग के सम्मान में निभाई लाल चावल की रूहणी की परंपरा
Thu, 02 Jul 2026 11:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिपुर (कुल्लू)। देव संस्कृति के लिए प्रसिद्ध कुल्लू घाटी में बुधवार को आराध्य देवता वासुकी नाग के सम्मान में सदियों पुरानी लाल चावल की रूहणी (धान रोपाई) की परंपरा श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई गई।
हल्लाण-सेरी में देवता के हारियानों और कारकूनों ने देव आदेश एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धान की रोपाई की। इस धार्मिक अनुष्ठान में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से खेत में धान रोपा। देव परंपरा के अनुसार एक दिन पहले खेत तैयार किया गया, जबकि बुधवार को शुभ मुहूर्त में रोपाई का कार्य संपन्न हुआ।
स्थानीय निवासी रणजीत, हरीश, शेर सिंह, इंद्रा, भादरी देवी और पवना ने बताया कि यह परंपरा हर वर्ष 30 जून और 1 जुलाई को निभाई जाती है। मान्यता है कि देवता वासुकी नाग के सम्मान में की गई यह रोपाई क्षेत्र में अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
विज्ञापन
रोपाई के बाद श्रद्धालुओं को इसी खेत में उगाए गए लाल चावल का प्रसाद भंडारे के रूप में वितरित किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक समय में भी यह परंपरा देव संस्कृति, सामूहिक श्रम और सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण बनी हुई है।
विज्ञापन
हल्लाण-सेरी में देवता के हारियानों और कारकूनों ने देव आदेश एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धान की रोपाई की। इस धार्मिक अनुष्ठान में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से खेत में धान रोपा। देव परंपरा के अनुसार एक दिन पहले खेत तैयार किया गया, जबकि बुधवार को शुभ मुहूर्त में रोपाई का कार्य संपन्न हुआ।
विज्ञापन
स्थानीय निवासी रणजीत, हरीश, शेर सिंह, इंद्रा, भादरी देवी और पवना ने बताया कि यह परंपरा हर वर्ष 30 जून और 1 जुलाई को निभाई जाती है। मान्यता है कि देवता वासुकी नाग के सम्मान में की गई यह रोपाई क्षेत्र में अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
विज्ञापन
रोपाई के बाद श्रद्धालुओं को इसी खेत में उगाए गए लाल चावल का प्रसाद भंडारे के रूप में वितरित किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक समय में भी यह परंपरा देव संस्कृति, सामूहिक श्रम और सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण बनी हुई है।