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Mandi News: चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषी, एक साल की सजा
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मंडी। वर्ष 2017 के चेक बाउंस के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) मंडी की अदालत ने आरोपी तेज सिंह निवासी गांव डाइकर तहसील चच्योट को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता को 11 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। मुआवजे का भुगतान न करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सैनी ने बताया कि वह नेरचौक में बीजों का कारोबार करता है। आरोपी ने विभिन्न किस्मों के बीज खरीदे थे। आंशिक भुगतान के बाद शेष राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 5,54,555 रुपये का चेक जारी किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चेक पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा गया लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, जिस पर वर्ष 2017 में परिवाद दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने खाली सुरक्षा चेक दिए थे, जबकि भुगतान नकद कर दिया था और बीज भी लौटा दिए थे। हालांकि, अदालत ने पाया कि इन दावों के समर्थन में आरोपी कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। शिकायतकर्ता की ओर से चेक, बैंक मेमो, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनसे देनदारी सिद्ध हुई।
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अदालत ने कहा कि आरोपी चेक के संबंध में कानून के तहत मिलने वाली धारणा (प्रिजम्प्शन) को खंडित करने में असफल रहा। ऐसे में उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया। सजा सुनाते हुए अदालत ने दोषी को एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ शिकायतकर्ता को 11 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। फैसले के बाद अपील दायर करने के लिए दोषी को 30 दिन की अवधि तक जमानत दी गई।
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अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सैनी ने बताया कि वह नेरचौक में बीजों का कारोबार करता है। आरोपी ने विभिन्न किस्मों के बीज खरीदे थे। आंशिक भुगतान के बाद शेष राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 5,54,555 रुपये का चेक जारी किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चेक पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा गया लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, जिस पर वर्ष 2017 में परिवाद दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने खाली सुरक्षा चेक दिए थे, जबकि भुगतान नकद कर दिया था और बीज भी लौटा दिए थे। हालांकि, अदालत ने पाया कि इन दावों के समर्थन में आरोपी कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। शिकायतकर्ता की ओर से चेक, बैंक मेमो, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनसे देनदारी सिद्ध हुई।
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अदालत ने कहा कि आरोपी चेक के संबंध में कानून के तहत मिलने वाली धारणा (प्रिजम्प्शन) को खंडित करने में असफल रहा। ऐसे में उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया। सजा सुनाते हुए अदालत ने दोषी को एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ शिकायतकर्ता को 11 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। फैसले के बाद अपील दायर करने के लिए दोषी को 30 दिन की अवधि तक जमानत दी गई।