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Mandi News: जलेब के स्वरूप में बदलाव पर देव समाज चिंतित
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मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान राजदेवता माधोराय के साथ निकलने वाली तीनों जलेब के स्वरूप में आ रहे बदलाव को लेकर सर्व देवता सेवा समिति जिला मंडी और जिले के कारदारों ने चिंता जताई है। कारदारों का कहना है कि जलेब का पारंपरिक, शांत और धार्मिक स्वरूप धीरे-धीरे बिगड़ रहा है।
जलेब पारंपरिक और शांतिपूर्ण ढंग से निकाली जाए तथा अनुशासन बनाए रखा जाए। यह बात देव सदन-संस्कृति सदन कांगनी में शनिवार को आयोजित सर्व देवता सेवा समिति की साधारण सभा में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान शिवपाल शर्मा ने की। बैठक में महाशिवरात्रि मेले, देव परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
सर्व देवता सेवा समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि जिन स्थानों पर देवी-देवताओं को बैठाया गया है, उन्हें कुल्लू की तर्ज पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि बार-बार स्थान परिवर्तन की आवश्यकता न पड़े। लगभग 52-53 वर्षों के बाद अब देवी-देवताओं को पुनः सरकारी भूमि पड्डल मैदान की सीढ़ियों पर बैठाया जा रहा है।
सभा में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष माधोराय की जलेब पड्डल मैदान में बैठे देवी-देवताओं के समक्ष से होते हुए चानणी तक जाएगी, जहां माधोराय को विराजमान किया जाएगा। जलेब के दौरान प्रत्येक देवता के कारदार छड़ी और शेष फूल लेकर माधोराय का स्वागत करेंगे, जिससे पुरानी देव परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सके।
सभा में देव कमरुनाग को लेकर भी महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। चर्चा की गई कि सात गढ़ की जनता की ओर से देवता को पुजारी के सुपुर्द करने के बाद 22 जनवरी की रात से 24 जनवरी की सुबह तक बारिश हुई, लेकिन दो व्यक्तियों की ओर से इसका श्रेय लेने की बात सामने आई। यह देव परंपरा के विरुद्ध है। देव कमरुनाग समिति से आग्रह किया गया कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
बैठक में कारदारों ने उपायुक्त से देवी-देवताओं और बजंतरियों के मानदेय में 15 प्रतिशत वृद्धि की मांग भी रखी। बैठक में भीम चंद, हुकम चंद, मोहन लाल, गोबिंद ठाकुर, सुरेंद्र गुलेरिया सचिव, हेम राज, भीम देव समेत कई पदाधिकारी और कारदार उपस्थित रहे।
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जलेब पारंपरिक और शांतिपूर्ण ढंग से निकाली जाए तथा अनुशासन बनाए रखा जाए। यह बात देव सदन-संस्कृति सदन कांगनी में शनिवार को आयोजित सर्व देवता सेवा समिति की साधारण सभा में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान शिवपाल शर्मा ने की। बैठक में महाशिवरात्रि मेले, देव परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
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सर्व देवता सेवा समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि जिन स्थानों पर देवी-देवताओं को बैठाया गया है, उन्हें कुल्लू की तर्ज पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि बार-बार स्थान परिवर्तन की आवश्यकता न पड़े। लगभग 52-53 वर्षों के बाद अब देवी-देवताओं को पुनः सरकारी भूमि पड्डल मैदान की सीढ़ियों पर बैठाया जा रहा है।
सभा में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष माधोराय की जलेब पड्डल मैदान में बैठे देवी-देवताओं के समक्ष से होते हुए चानणी तक जाएगी, जहां माधोराय को विराजमान किया जाएगा। जलेब के दौरान प्रत्येक देवता के कारदार छड़ी और शेष फूल लेकर माधोराय का स्वागत करेंगे, जिससे पुरानी देव परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सके।
सभा में देव कमरुनाग को लेकर भी महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। चर्चा की गई कि सात गढ़ की जनता की ओर से देवता को पुजारी के सुपुर्द करने के बाद 22 जनवरी की रात से 24 जनवरी की सुबह तक बारिश हुई, लेकिन दो व्यक्तियों की ओर से इसका श्रेय लेने की बात सामने आई। यह देव परंपरा के विरुद्ध है। देव कमरुनाग समिति से आग्रह किया गया कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
बैठक में कारदारों ने उपायुक्त से देवी-देवताओं और बजंतरियों के मानदेय में 15 प्रतिशत वृद्धि की मांग भी रखी। बैठक में भीम चंद, हुकम चंद, मोहन लाल, गोबिंद ठाकुर, सुरेंद्र गुलेरिया सचिव, हेम राज, भीम देव समेत कई पदाधिकारी और कारदार उपस्थित रहे।
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