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Mandi News: कवियों ने रचनाओं और व्यंग्य से किया मंत्रमुग्ध
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सुंदरनगर (मंडी)। वसंत पंचमी पर सुकेत साहित्य परिषद की ओर से सुंदरनगर में शनिवार को कवि सम्मेलन एवं साहित्यिक गोष्ठी का आयोजनकिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रतन लाल शर्मा ने की। कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोष्ठी की शुरुआत मुकेश कुमार ने अपनी एक भावपूर्ण रचना और प्रसिद्ध गीत वो शाम उनका ख्याल हो गया प्रस्तुत कर की। इसके बाद स्वामी राणा ने हिमाचल आज ये बोल रहा है, खून के आंसू रो रहा है कविता के माध्यम से नेताओं पर तीखा कटाक्ष किया। भीम सिंह परदेसी ने न चमन में आते ही आई बहार है तथा मंडयाली बोली में मां सरस्वती, वसंत पंचमी और नेता सुभाष चंद्र बोस पर आधारित कविताएं सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया।
हीरा सिंह कौशल ने मां शारदे कृपा संसार में, विद्या दान की कृपा बरसादे भक्ति कविता प्रस्तुत की। कुलभूषण चब्बा ने मंडयाली गीत चैल चील देवदारा से जित्थी झुलदे डालू, लै बंसरी उच्ची रिड़ियां गांदे हैं गवालु सहित एक हिंदी गीत सुनाया। सुरेंद्र मिश्रा ने जीवन में मुस्कुराहट को आत्मसात करने पर आधारित कविता से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में रतन लाल शर्मा ने हास्य से भरपूर व्यंग्य प्रस्तुत कर वातावरण को हंसी ठिठोली से भर दिया। परिषद के अध्यक्ष कृष्ण चंद महादेविया ने एक बाल कविता और लघु कथा सुनाकर गोष्ठी का प्रभावशाली समापन दिया। संवाद
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गोष्ठी की शुरुआत मुकेश कुमार ने अपनी एक भावपूर्ण रचना और प्रसिद्ध गीत वो शाम उनका ख्याल हो गया प्रस्तुत कर की। इसके बाद स्वामी राणा ने हिमाचल आज ये बोल रहा है, खून के आंसू रो रहा है कविता के माध्यम से नेताओं पर तीखा कटाक्ष किया। भीम सिंह परदेसी ने न चमन में आते ही आई बहार है तथा मंडयाली बोली में मां सरस्वती, वसंत पंचमी और नेता सुभाष चंद्र बोस पर आधारित कविताएं सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया।
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हीरा सिंह कौशल ने मां शारदे कृपा संसार में, विद्या दान की कृपा बरसादे भक्ति कविता प्रस्तुत की। कुलभूषण चब्बा ने मंडयाली गीत चैल चील देवदारा से जित्थी झुलदे डालू, लै बंसरी उच्ची रिड़ियां गांदे हैं गवालु सहित एक हिंदी गीत सुनाया। सुरेंद्र मिश्रा ने जीवन में मुस्कुराहट को आत्मसात करने पर आधारित कविता से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में रतन लाल शर्मा ने हास्य से भरपूर व्यंग्य प्रस्तुत कर वातावरण को हंसी ठिठोली से भर दिया। परिषद के अध्यक्ष कृष्ण चंद महादेविया ने एक बाल कविता और लघु कथा सुनाकर गोष्ठी का प्रभावशाली समापन दिया। संवाद