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Mandi News: इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन सोशल साइंस में हुरंग नारायण का उल्लेख
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मंडी। सुंदरनगर के डॉक्टर संदीप राघव ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विरासत पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण शोध पत्र अमेरिका की इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन सोशल साइंस पत्रिका में प्रकाशित किया है।
इस शोधपत्र में मंडी और सुकेत रियासत के देवी देवताओं, मंदिरों का वर्णन है। शोध पत्र में उल्लेख है कि देव हुरंग नारायण की पूजा मंडी रियासत में माधो राय की स्थापना से कई दशक पहले से प्रचलित थी। चौहारघाटी के हुरंग गांव में स्थित देव हुरंग नारायण को जल और अग्नि का देवता माना जाता है। राज्य के राजपत्रीय अभिलेखों में मंडी रियासत के शासक राजा साहिब सेन (1554-1574 ई.) और उनकी रानी प्रकाश देई संतानहीन थे। उन्होंने हुरंग गांव में स्थित देव हुरंग नारायण से मन्नत मांगी थी कि पुत्र प्राप्ति होने पर वह देवता को चांदी की प्रतिमा अर्पित करेंगे। मन्नत पूरी होने पर राजा के पुत्र का जन्म हुआ और उनका नाम नारायण सेन रखा गया, जो बाद में 1575 ईस्वी में मंडी के शासक बने।
हुरंग नारायण मंदिर और रानी प्रकाश देई की आस्था का शोध में उल्लेख है कि राजा साहिब सेन ने देवदार के वनों से घिरे क्षेत्र में देव हुरंग नारायण का नया मंदिर बनवाया। रानी प्रकाश देई ने अपने झीर के हार से चांदी का मोहरा बनवाकर देवता को अर्पित किया। यही कारण है कि आज भी पूजा-पाठ के दौरान गुरु अपने मंत्रों में रानी प्रकाश देई का नाम बार-बार जपते हैं। संवाद
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इस शोधपत्र में मंडी और सुकेत रियासत के देवी देवताओं, मंदिरों का वर्णन है। शोध पत्र में उल्लेख है कि देव हुरंग नारायण की पूजा मंडी रियासत में माधो राय की स्थापना से कई दशक पहले से प्रचलित थी। चौहारघाटी के हुरंग गांव में स्थित देव हुरंग नारायण को जल और अग्नि का देवता माना जाता है। राज्य के राजपत्रीय अभिलेखों में मंडी रियासत के शासक राजा साहिब सेन (1554-1574 ई.) और उनकी रानी प्रकाश देई संतानहीन थे। उन्होंने हुरंग गांव में स्थित देव हुरंग नारायण से मन्नत मांगी थी कि पुत्र प्राप्ति होने पर वह देवता को चांदी की प्रतिमा अर्पित करेंगे। मन्नत पूरी होने पर राजा के पुत्र का जन्म हुआ और उनका नाम नारायण सेन रखा गया, जो बाद में 1575 ईस्वी में मंडी के शासक बने।
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हुरंग नारायण मंदिर और रानी प्रकाश देई की आस्था का शोध में उल्लेख है कि राजा साहिब सेन ने देवदार के वनों से घिरे क्षेत्र में देव हुरंग नारायण का नया मंदिर बनवाया। रानी प्रकाश देई ने अपने झीर के हार से चांदी का मोहरा बनवाकर देवता को अर्पित किया। यही कारण है कि आज भी पूजा-पाठ के दौरान गुरु अपने मंत्रों में रानी प्रकाश देई का नाम बार-बार जपते हैं। संवाद
