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Mandi News: पीलिया ने फिर छीन ली परिवार की खुशियां
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उपमंडल में दो साल पहले चार लोगों की हुई थी मौत, संक्रमित हुए थे 400 लोग
झलवान निवासी 38 साल के नौजवान की मौत से क्षेत्र में फिर पीलिया की दहशत
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। झलवान गांव में काला पीलिया से 38 वर्षीय युवक रणजीत की मौत से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। दो साल पहले पीलिया के प्रकोप से उपमंडल में चार मौतों के बाद जोगिंद्रनगर में फिर पीलिया जानलेवा साबित हुआ है। उस दौरान 400 लोग पीलिया की चपेट में आए थे। रणजीत की मौत से पत्नी आशु देवी, मां रानी देवी और सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी अराध्या पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे रणजीत के निधन से बेटी की पढ़ाई और परवरिश को लेकर परिजन चिंतित हैं।
परिजनों के अनुसार रणजीत को करीब आठ दिन पहले बुखार आया था। स्थानीय अस्पताल के बाद कांगड़ा के निजी चिकित्सकों से उसका उपचार करवाया गया, जहां उसे पीलिया से पीड़ित बताया गया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि रणजीत के पिता अमर सिंह लोक निर्माण विभाग में सेवारत थे और चार वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। करीब दो माह पहले ही रणजीत ने पिता का चतुर्थ वार्षिक श्राद्ध किया था। परिवार पुराने दुख से उबर ही रहा था कि अब घर के इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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झलवान निवासी 38 साल के नौजवान की मौत से क्षेत्र में फिर पीलिया की दहशत
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। झलवान गांव में काला पीलिया से 38 वर्षीय युवक रणजीत की मौत से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। दो साल पहले पीलिया के प्रकोप से उपमंडल में चार मौतों के बाद जोगिंद्रनगर में फिर पीलिया जानलेवा साबित हुआ है। उस दौरान 400 लोग पीलिया की चपेट में आए थे। रणजीत की मौत से पत्नी आशु देवी, मां रानी देवी और सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी अराध्या पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे रणजीत के निधन से बेटी की पढ़ाई और परवरिश को लेकर परिजन चिंतित हैं।
परिजनों के अनुसार रणजीत को करीब आठ दिन पहले बुखार आया था। स्थानीय अस्पताल के बाद कांगड़ा के निजी चिकित्सकों से उसका उपचार करवाया गया, जहां उसे पीलिया से पीड़ित बताया गया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई।
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बताया जा रहा है कि रणजीत के पिता अमर सिंह लोक निर्माण विभाग में सेवारत थे और चार वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। करीब दो माह पहले ही रणजीत ने पिता का चतुर्थ वार्षिक श्राद्ध किया था। परिवार पुराने दुख से उबर ही रहा था कि अब घर के इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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