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Mandi News: आईआईटी में एनआरएफ के सीईओ का दौरा, शोध और नवाचार को मिलेगी रफ्तार
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राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर चर्चा
आईआईटी मंडी में अनुसंधान क्षेत्र को नई दिशा देने के दिए संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। आईआईटी मंडी में नेशनल रिचर्स फाउंडेशन (एनआरएफ) के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन के दौरे ने देश के शोध एवं नवाचार क्षेत्र में नई दिशा देने का संकेत दिया है। इस दौरे में संस्थागत शोध क्षमता, फंडिंग और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहा।
दौरे के दौरान आईआईटी मंडी को राष्ट्रीय शोध परिदृश्य में अग्रणी बनाने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि एनआरएफ की पहल देश में मजबूत और टिकाऊ शोध पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। स्पष्ट किया कि आईआईटी मंडी बहुविषयक शोध और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
डॉ. कल्याणरामन ने आईआईटी मंडी को भारत के शोध भविष्य का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि यहां विकसित हो रहे नवाचार और अंतः विषय परियोजनाएं देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि एनआरएफ संस्थानों को बेहतर फंडिंग, सहयोग और वैश्विक अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें और अधिक सशक्त बनाएगा।
दौरे के दौरान सीईओ ने संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ सीधे संवाद कर शोध तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने एनआरएफ की आगामी योजनाओं, फंडिंग मॉडल और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की, जिससे मूलभूत विज्ञान और सामाजिक नवाचार को गति मिल सके।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एनआरएफ विजन भारत को अनुसंधान एवं नवाचार शक्ति के रूप में सशक्त बनाना विषय पर आयोजित कोलोकीयम रहा। इसमें भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने की रणनीति प्रस्तुत की गई। इस दौरान आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमेडिकल साइंस, ऊर्जा भंडारण, क्वांटम फिजिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में चल रहे शोध कार्यों को साझा किया। डीन डॉ. श्याम कुमार मसकापल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ इस तरह की सहभागिता संस्थान के शोध योगदान को नई ऊंचाई देती है। इसके अलावा, हिमाचल के प्रमुख संस्थानों के साथ गोलमेज बैठक आयोजित कर क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा दिया गया। डॉ. कल्याणरामन ने आईआईटी मंडी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों का निरीक्षण कर विकसित तकनीकों के व्यवसायीकरण की संभावनाओं पर भी जानकारी ली।
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आईआईटी मंडी में अनुसंधान क्षेत्र को नई दिशा देने के दिए संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। आईआईटी मंडी में नेशनल रिचर्स फाउंडेशन (एनआरएफ) के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन के दौरे ने देश के शोध एवं नवाचार क्षेत्र में नई दिशा देने का संकेत दिया है। इस दौरे में संस्थागत शोध क्षमता, फंडिंग और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहा।
दौरे के दौरान आईआईटी मंडी को राष्ट्रीय शोध परिदृश्य में अग्रणी बनाने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि एनआरएफ की पहल देश में मजबूत और टिकाऊ शोध पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। स्पष्ट किया कि आईआईटी मंडी बहुविषयक शोध और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
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डॉ. कल्याणरामन ने आईआईटी मंडी को भारत के शोध भविष्य का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि यहां विकसित हो रहे नवाचार और अंतः विषय परियोजनाएं देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि एनआरएफ संस्थानों को बेहतर फंडिंग, सहयोग और वैश्विक अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें और अधिक सशक्त बनाएगा।
दौरे के दौरान सीईओ ने संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ सीधे संवाद कर शोध तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने एनआरएफ की आगामी योजनाओं, फंडिंग मॉडल और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की, जिससे मूलभूत विज्ञान और सामाजिक नवाचार को गति मिल सके।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एनआरएफ विजन भारत को अनुसंधान एवं नवाचार शक्ति के रूप में सशक्त बनाना विषय पर आयोजित कोलोकीयम रहा। इसमें भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने की रणनीति प्रस्तुत की गई। इस दौरान आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमेडिकल साइंस, ऊर्जा भंडारण, क्वांटम फिजिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में चल रहे शोध कार्यों को साझा किया। डीन डॉ. श्याम कुमार मसकापल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ इस तरह की सहभागिता संस्थान के शोध योगदान को नई ऊंचाई देती है। इसके अलावा, हिमाचल के प्रमुख संस्थानों के साथ गोलमेज बैठक आयोजित कर क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा दिया गया। डॉ. कल्याणरामन ने आईआईटी मंडी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों का निरीक्षण कर विकसित तकनीकों के व्यवसायीकरण की संभावनाओं पर भी जानकारी ली।