Himachal News : एनटीपीसी कोलडैम ने रचा इतिहास, 10 साल में पहली बार 3612.82 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन
एनटीपीसी की 800 मेगावाट क्षमता वाली कोलडैम जलविद्युत परियोजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में 3612.82 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर 10 वर्षों का नया रिकॉर्ड बनाया। यह परियोजना की डिजाइन क्षमता से 558 मिलियन यूनिट अधिक है। बेहतर तकनीकी संचालन, कम फोर्स्ड आउटेज और उच्च क्षमता उपयोग के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई। परियोजना से उत्तर भारत के कई राज्यों को बिजली आपूर्ति की जाती है।
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बिलासपुर-मंडी सीमा पर स्थित एनटीपीसी की 800 मेगावाट क्षमता वाली कोलडैम जलविद्युत परियोजना ने बिजली उत्पादन का नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 3612.82 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर वर्ष 2015 में व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन दर्ज किया है। यह पिछले दस वर्षों का भी सर्वोच्च रिकॉर्ड है। परियोजना ने अपनी 3054.79 मिलियन यूनिट की डिजाइन ऊर्जा क्षमता से करीब 558 मिलियन यूनिट अधिक बिजली का उत्पादन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि बेहतर संचालन, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क का परिणाम मानी जा रही है।
रिकॉर्ड उत्पादन के साथ संयंत्र ने पूरे वर्ष 51.55 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) और 100.53 प्रतिशत घोषित क्षमता हासिल की। वहीं, अनियोजित शटडाउन (फोर्स्ड आउटेज) केवल 0.27 प्रतिशत रहा, जो परियोजना के प्रभावी रखरखाव और कुशल संचालन को दर्शाता है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में कोलडैम परियोजना ने 3353.11 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया था। इस बार उत्पादन में लगभग 260 मिलियन यूनिट की वृद्धि दर्ज की गई है। लगातार दूसरे वर्ष रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ परियोजना ने उत्तर भारत की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में अपनी मजबूत संचालन क्षमता साबित की है।
35.27 बिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन
18 जुलाई 2015 को व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद 26 जुलाई 2026 तक कोलडैम परियोजना 35.27 बिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर चुकी है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी 26 जुलाई तक 1083.14 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हो चुका है। अप्रैल और मई में परियोजना ने 100 प्रतिशत, जबकि जून और 26 जुलाई तक जुलाई माह में 110 प्रतिशत घोषित क्षमता हासिल कर नए वित्त वर्ष की भी शानदार शुरुआत की है। सतलुज नदी पर स्थित इस 800 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना से उत्पादित बिजली हिमाचल प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और चंडीगढ़ को भी आपूर्ति की जाती है।
एनटीपीसी कोलडैम के परियोजना प्रमुख एस.एस. राव ने कहा कि 3612.82 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का यह रिकॉर्ड पूरी टीम की प्रतिबद्धता, तकनीकी दक्षता और बेहतर संचालन का परिणाम है। भविष्य में भी परियोजना सुरक्षित, विश्वसनीय और अधिकतम क्षमता के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन जारी रखेगी।
कोलडैम क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रभावों का अब वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए एनटीपीसी कोलडैम ने आईआईटी बॉम्बे के साथ संयुक्त शोध पहल शुरू की है। वहीं, मंडी और सोलन जिलों में प्रस्तावित दो पम्प्ड स्टोरेज पावर प्लांट (पीएसपी) परियोजनाओं की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट भी मंजूरी के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को भेज दी गई है।
सुंदरनगर में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में परियोजना प्रमुख एस.एस. राव ने बताया कि एनटीपीसी का लक्ष्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास को भी समान महत्व देना है। इसी उद्देश्य से आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से कोलडैम क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस शोध के निष्कर्ष भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयोगी साबित होंगे।
उन्होंने बताया कि मंडी और सोलन जिलों में प्रस्तावित दो पम्प्ड स्टोरेज पावर प्लांट की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश में हरित ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ बिजली भंडारण क्षमता भी मजबूत होगी।
40 गांवों में 5.5 करोड़ रुपये के सीएसआर कार्य
एस.एस. राव ने बताया कि कोलडैम परियोजना से प्रभावित 40 गांवों में कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत लगभग 5.5 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं। इस दौरान वर्ष 2025-26 में किए गए सीएसआर कार्यों पर आधारित पत्रिका 'सामाजिक सरोकार' का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में एचआर प्रमुख मंगला हरिंदरन, डिप्टी जनरल मैनेजर (सीएसआर) अंजुला अग्रवाल, एजीएम योगेश शर्मा, कुमार स्वाधीन, वरिष्ठ प्रबंधक प्रणव डोगरा, नितिन और जनसंपर्क अधिकारी श्वेता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पम्प्ड स्टोरेज परियोजना जलविद्युत आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणाली है। इसमें दो जलाशय बनाए जाते हैं। बिजली की मांग कम होने पर निचले जलाशय का पानी पम्प कर ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है तो यही पानी वापस नीचे छोड़ा जाता है, जिससे टरबाइन चलती हैं और बिजली का उत्पादन होता है। यह प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली आपूर्ति को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।