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Mandi News: पीलिया में लापरवाही का मामला कोर्ट पहुंचा, प्रतिवादियों को नोटिस जारी

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:54 AM IST
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The case of negligence in jaundice reached the court, notice issued to the defendants
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गोहर बार एसोसिएशन ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा, कोर्ट में केस दायर
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। उपमंडल गोहर में पीलिया के बढ़ते प्रकोप और जल प्रबंधन में बरती गई कथित लापरवाही को लेकर स्थानीय वकीलों ने कड़ा रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन गोहर ने वीरवार को चच्योट कोर्ट की अदालत में सरकार, संबंधित विभागों और स्थानीय पंचायतों के खिलाफ एक दीवानी वाद दायर किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
दायर वाद में अध्यक्ष नवनीत वशिष्ठ, सचिव नारायण सिंह, दिनेश ठाकुर, अभिनव शर्मा, रिषभ शर्मा और खेम चंद सहित अन्य वादियों ने कहा है कि पिछले एक महीने में गोहर क्षेत्र (बासा, चैलचौक, गणई, नौण, कटलोग आदि) में पीलिया के 210 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बीते वीरवार को भी 7 नए मरीज मिले, जबकि उदित शर्मा नाम के एक युवक की मौत हो चुकी है। वकीलों ने इसे पब्लिक न्यूसेंस (सार्वजनिक उपद्रव) करार देते हुए स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
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बार एसोसिएशन ने इस कानूनी लड़ाई में प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से लेकर स्थानीय निकायों तक को घेरा है। इनमें जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव, उपायुक्त मंडी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी, जल शक्ति विभाग मंडल बग्गी की अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग उपमंडल गोहर के सहायक अभियंता, खंड विकास अधिकारी गोहर, पंचायत सचिव ग्राम पंचायत गोहर, बासा, चैलचौक, चच्योट, नेहरा गणई और नौण शामिल हैं।
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गंदे पानी और कचरे के ढेर पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि सीपीसी की धारा 91 के तहत यह मामला दायर किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में तेजी से हुए शहरीकरण (निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल) के बावजूद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की कोई व्यवस्था नहीं है। खुले में सीवरेज का पानी और कचरा प्राकृतिक जल स्रोतों में मिल रहा है। जल शक्ति विभाग की अपनी रिपोर्ट में कई पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। 34 लोगों को नोटिस तो दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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कोर्ट से यह मांगी राहत
सभी जल स्रोतों का तत्काल सुपर क्लोरिनेशन किया जाए।
क्षेत्र में स्थायी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए।
पंचायतों को कूड़ा प्रबंधन के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए।
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