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आपदा प्रभावितों को भूली सरकार, न जमीन मिली, न पूरा किराया : भूपेंद्र
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एक साल बाद भी 20 परिवारों का नहीं हुआ पुनर्वास
मुआवजे और मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लौंगनी के स्याठी गांव में पिछले वर्ष 30 जून की भीषण आपदा के एक साल बाद भी प्रभावित 20 परिवार पुनर्वास और मुआवजे के इंतजार में हैं। हिमाचल किसान सभा नेता भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने पीड़ितों को अकेला छोड़ दिया है।
उन्होंने बताया कि आपदा के बाद परिवारों को पहले मंदिर में और फिर किराये के मकानों में रखा गया, लेकिन अब तक केवल तीन माह का ही किराया मिला है। न तो पुनर्वास के लिए जमीन दी गई है और न ही पर्याप्त आर्थिक सहायता। कई परिवार खुद ही सामाजिक मदद से जमीन खरीदने को मजबूर हैं।
आरोप है कि केवल छह परिवारों के ही दावे तैयार हुए हैं, जबकि खतरे वाले घरों में रहने वाले अन्य प्रभावितों को भी राहत नहीं मिल रही। पशुधन के नुकसान का भी पूरा मुआवजा नहीं मिला है। दीप कुमार, कर्मदास और शनीचरू की 16 खच्चरें, धनीराम की 10 बकरियां, मिलखी राम की भैंस और बकरी, देशराज की चार भेड़ों, गर्दीता राम के बैलों तथा अन्य पशुधन के नुकसान का अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित परिवारों ने पेयजल, गैस सिलिंडर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया है। जल्द ही एसडीएम धर्मपुर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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उधर, प्रभावित परिवारों के सदस्यों ने बताया कि वे वर्तमान में जहां रह रहे हैं, वहां पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। कुछ परिवारों को रसोई गैस सिलिंडर तक उपलब्ध नहीं हुए हैं और उन्हें अपने खर्च पर व्यवस्था करनी पड़ रही है।
मुआवजे और मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लौंगनी के स्याठी गांव में पिछले वर्ष 30 जून की भीषण आपदा के एक साल बाद भी प्रभावित 20 परिवार पुनर्वास और मुआवजे के इंतजार में हैं। हिमाचल किसान सभा नेता भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने पीड़ितों को अकेला छोड़ दिया है।
उन्होंने बताया कि आपदा के बाद परिवारों को पहले मंदिर में और फिर किराये के मकानों में रखा गया, लेकिन अब तक केवल तीन माह का ही किराया मिला है। न तो पुनर्वास के लिए जमीन दी गई है और न ही पर्याप्त आर्थिक सहायता। कई परिवार खुद ही सामाजिक मदद से जमीन खरीदने को मजबूर हैं।
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आरोप है कि केवल छह परिवारों के ही दावे तैयार हुए हैं, जबकि खतरे वाले घरों में रहने वाले अन्य प्रभावितों को भी राहत नहीं मिल रही। पशुधन के नुकसान का भी पूरा मुआवजा नहीं मिला है। दीप कुमार, कर्मदास और शनीचरू की 16 खच्चरें, धनीराम की 10 बकरियां, मिलखी राम की भैंस और बकरी, देशराज की चार भेड़ों, गर्दीता राम के बैलों तथा अन्य पशुधन के नुकसान का अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित परिवारों ने पेयजल, गैस सिलिंडर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया है। जल्द ही एसडीएम धर्मपुर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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