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Mandi News: कुन्नू ग्राम पंचायत में आपदा प्रभावितों की अनदेखी से ग्रामीण नाराज
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रात को तिरपाल के नीचे नौ मवेशी बांध रहा प्रभावित
गोशाला ढहे बीत गया छह महीने से अधिक समय, नसीब नहीं हुई पक्की छत
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। पधर की ग्राम पंचायत कुन्नू में आपदा प्रभावितों की समस्याओं की अनदेखी के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है। कुन्नू वार्ड के निवासी सतीश कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा में उनकी गोशाला ढह चुकी है और छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक पक्की छत नहीं मिली।
सतीश कुमार ने आरोप लगाया कि निवर्तमान हलका पटवारी की गलत कार्रवाई के कारण उन्हें सरकारी मदद से वंचित रखा गया है। उन्होंने बताया कि पटवारी ने ढही हुई गोशाला को अवैध कब्जा में दिखा दिया, जबकि प्रशासन ने विकास खंड विभाग के माध्यम से उन्हें नई गोशाला मंजूर की थी। सतीश कुमार ने पंचायत पर भेदभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि गांव में कुछ लोगों की गोशालाएं बनकर तैयार हो गई हैं, जबकि उनके पास एक भी पशु नहीं है। वहीं, उनके पास नौ मवेशी हैं और पूरा परिवार पशुपालन पर ही निर्भर है, फिर भी उन्हें निर्माण की अनुमति नहीं दी गई। वर्तमान में सतीश कुमार अपने नौ मवेशियों को प्रशासन द्वारा दिए गए तिरपाल के नीचे खुले में रखने को मजबूर हैं, जिससे जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है।
इस मामले पर एसडीएम पधर सुरजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को मनरेगा के माध्यम से गोशाला निर्माण से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रभावित व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर गोशाला का निर्माण कर सकता है। यदि ढही हुई गोशाला सरकारी भूमि पर थी, तो नियमानुसार उसका मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
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गोशाला ढहे बीत गया छह महीने से अधिक समय, नसीब नहीं हुई पक्की छत
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। पधर की ग्राम पंचायत कुन्नू में आपदा प्रभावितों की समस्याओं की अनदेखी के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है। कुन्नू वार्ड के निवासी सतीश कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा में उनकी गोशाला ढह चुकी है और छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक पक्की छत नहीं मिली।
सतीश कुमार ने आरोप लगाया कि निवर्तमान हलका पटवारी की गलत कार्रवाई के कारण उन्हें सरकारी मदद से वंचित रखा गया है। उन्होंने बताया कि पटवारी ने ढही हुई गोशाला को अवैध कब्जा में दिखा दिया, जबकि प्रशासन ने विकास खंड विभाग के माध्यम से उन्हें नई गोशाला मंजूर की थी। सतीश कुमार ने पंचायत पर भेदभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि गांव में कुछ लोगों की गोशालाएं बनकर तैयार हो गई हैं, जबकि उनके पास एक भी पशु नहीं है। वहीं, उनके पास नौ मवेशी हैं और पूरा परिवार पशुपालन पर ही निर्भर है, फिर भी उन्हें निर्माण की अनुमति नहीं दी गई। वर्तमान में सतीश कुमार अपने नौ मवेशियों को प्रशासन द्वारा दिए गए तिरपाल के नीचे खुले में रखने को मजबूर हैं, जिससे जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है।
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इस मामले पर एसडीएम पधर सुरजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को मनरेगा के माध्यम से गोशाला निर्माण से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रभावित व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर गोशाला का निर्माण कर सकता है। यदि ढही हुई गोशाला सरकारी भूमि पर थी, तो नियमानुसार उसका मुआवजा नहीं दिया जा सकता।