Himachal: अवैध खनन के मामले में विधायक आशीष के चाचा और भाई ने किया आत्मसमर्पण, रिमांड मिलने पर गिरफ्तार
अदालत से दोनों को एक दिन के पुलिस रिमांड मिली है, जिसके बाद अदालत दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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सदर विधायक आशीष शर्मा के चाचा प्रवीण शर्मा और भाई उमेश शर्मा ने बंद स्टोन क्रशर से कथित अवैध खनन मामले में बुधवार को अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत से दोनों को एक दिन के पुलिस रिमांड मिली है, जिसके बाद अदालत दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि आरोपी पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहे और सात दिन के रिमांड की मांग की गई। आरोपियों को वीरवार को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। एएसपी हमीरपुर राजेश कुमार ने कहा कि अदालत से आरोपियों को एक दिन का पुलिस रिमांड मिला है जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
मामला 13 अगस्त 2025 का जब एएसपी हमीरपुर राजेश कुमार की नेतृत्व में सुजानपुर थाना की टीम ने बंद क्रशर में पुंघ खड्ड में छापेमारी की थी। इस दौरान कथित तौर पर पुलिस ने पत्थर, बजरी और मशीनरी इत्यादि को पुलिस ने कब्जे में लिया था। पुलिस ने इस मामले में विधायक आशीष शर्मा के सगे भाई और चाचा के साथ दो कर्मियों को आरोपी बनाया था।
मामले में दोनों कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से 19 मार्च 2026 को अग्रिम जमानत मिल गई थी जबकि प्रवीण शर्मा और उमेश शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई थी। दोनों को 16 अप्रैल तक कोर्ट में पेश होने के आदेश हुए थे। मामले में लंबी जांच के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराएं जोड़ी है। छापेमारी के दौरान सीसीटीवी कैमरों की हार्ड ड्राइव को कब्जे में लिया गया था। कार्रवाई के दूसरे दिन ही विधायक आशीष शर्मा ने पुलिस पर ट्रेस पासिंग और चोरी के गंभीर आरोप लगाए थे।
पुलिस के अनुसार अवैध खनन कर निकाले गए पत्थर, बजरी और मशीनरी क्रशर परिसर से बरामद की गई है। वहीं, क्रशर के मालिक ने दलील दी है कि बिना वारंट के क्रशर में घुसकर कर्मचारियों को धमकाया गया है और सीसीटीवी की हार्ड ड्राइव भी चोरी की गई है। पुलिस जिस सामग्री को अवैध खनन बता रही है वह क्रशर बंद होने से पहले का यहां पर मौजूद थी।
प्रदेश में अराजक माहौल, अधिकारी झूठे केसों में व्यस्त: आशीष
सदर विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। डेढ़ माह तक की जांच में पुलिस थाने में 40 घंटे से अधिक परिवार के सदस्य जांच में शामिल हुए। प्रदेश में अपराध और अराजकता का माहौल है और पुलिस अधिकारी राजनीतिक दवाब में झूठे केस दर्ज करने में लगे हैं। कानून व्यवस्था को संभालने बजाय राजनीतिक दबाव में पुलिस अधिकारी नेताओं के एजेंट के रूप में कार्य षड़यंत्र रच रहे हैं। विधानसभा में तथ्यों सहित इस विषय को रखा है। अदालत के न्याय से दूध का दूध और पानी का पानी होगा। सत्य परेशान हो सकता है लेकिन परास्त नहीं और अदालत में सत्य की जीत होगी।

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