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Rampur Bushahar News: पार्क का नाम बदला, नहीं बदला हाल, अब जनता पूछेगी सवाल
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पार्क के अंदर दिन के समय बैठे लोग
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रोहड़ू के पार्क में टूटे फव्वारे और रेलिंग, खस्ताहाल रास्ते बता रहे नगर परिषद की उदासीनता
शौचालय तक की नहीं सुविधा, रात को नशेड़ियों का ठिकाना
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। नगर परिषद का इकलौता पार्क अब सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि अनदेखी और खोखले विकास के दावों का जीता-जागता मिसाल बन चुका है। वर्ष 1991 में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह पार्क बनवाया था। आज यह पार्क खंडहर में बदल गया है। चुनावी माहौल में यही बदहाली अब जनता का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। पार्क के टूटे फव्वारे, गिरी हुई रेलिंग, उखड़े रास्ते और खस्ताहाल बैठने की जगहें प्रशासन की उदासीनता की कहानी बयां कर रही हैं। हालत इतनी खराब है कि यहां परिवार के साथ बैठना तो दूर, सुरक्षित खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है। शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं है, जो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करती है। नगर परिषद रोहड़ू ने वार्ड नंबर-सात में बने इस पार्क को करीब डेढ़ साल पहले अपने अधीन कर लिया और नाम बदलकर राजा वीरभद्र सिंह पार्क रख दिया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पार्क का केवल नाम बदला, हालात नहीं। नगर परिषद ने इसके सुधार की पहल जरूर की। पार्क में रेलिंग और फेंसिंग के लिए आठ लाख का टेंडर लगाया, लेकिन अभी तक यह टेंडर कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। इसका मुख्य गेट जरूर सुधार गया, लेकिन पार्क के अंदर रास्ते और फव्वारे के लिए 28 लाख का एस्टीमेट शहरी विकास विभाग की फाइलों में धूल फांक रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रात होते ही यह पार्क नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है। अब चुनावी सरगर्मियों के बीच जनता खुलकर सामने आने लगी है। लोग साफ कह रहे हैं कि जब शहर का इकलौता पार्क ही नहीं संभल पा रहा, तो विकास के दावे महज जुमले हैं। इस बार रोहड़ू की जनता नेताओं से वादे नहीं, जवाब चाहती है। जनता का कहना है कि वोट उसी को मिलेगा, जो इस बदहाल पार्क को संवारने की ठोस और समयबद्ध योजना देगा।
खंडहर बन चुका पार्क
पार्क में लोग सुबह-शाम घूमने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पार्क के अंदर लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। यहां महिलाओं, बच्चों के बैठने और खेलने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर परिषद का पहला पार्क अब खंडहर बन चुका है। सुरेश फोल्टा-- -
रोहड़ू के इकलौते पार्क में सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। इसकी कुछ दूरी पर सर्किट हाउस, रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग के एसई कार्यालय है। इसके अलावा पर्यटन निगम का होटल है। सभी बड़े नेता यहां ठहरते हैं, लेकिन पार्क की कोई सुध नहीं ले रहा है। - भगवती प्रसाद
पार्क सुंदर स्थान पर अच्छे वातावरण के बीच में जरूर बनाया गया, लेकिन यहां रात को नशेड़ी होते हैं। दिन के समय लावारिस पशु होते हैं। नगर परिषद को इस पार्क को सुधरने की खास जरूरत है। महिलाओं और बच्चों के लिए इस पार्क में कोई सुविधा नहीं है।-- - श्रेया
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शौचालय तक की नहीं सुविधा, रात को नशेड़ियों का ठिकाना
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। नगर परिषद का इकलौता पार्क अब सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि अनदेखी और खोखले विकास के दावों का जीता-जागता मिसाल बन चुका है। वर्ष 1991 में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह पार्क बनवाया था। आज यह पार्क खंडहर में बदल गया है। चुनावी माहौल में यही बदहाली अब जनता का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। पार्क के टूटे फव्वारे, गिरी हुई रेलिंग, उखड़े रास्ते और खस्ताहाल बैठने की जगहें प्रशासन की उदासीनता की कहानी बयां कर रही हैं। हालत इतनी खराब है कि यहां परिवार के साथ बैठना तो दूर, सुरक्षित खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है। शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं है, जो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करती है। नगर परिषद रोहड़ू ने वार्ड नंबर-सात में बने इस पार्क को करीब डेढ़ साल पहले अपने अधीन कर लिया और नाम बदलकर राजा वीरभद्र सिंह पार्क रख दिया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पार्क का केवल नाम बदला, हालात नहीं। नगर परिषद ने इसके सुधार की पहल जरूर की। पार्क में रेलिंग और फेंसिंग के लिए आठ लाख का टेंडर लगाया, लेकिन अभी तक यह टेंडर कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। इसका मुख्य गेट जरूर सुधार गया, लेकिन पार्क के अंदर रास्ते और फव्वारे के लिए 28 लाख का एस्टीमेट शहरी विकास विभाग की फाइलों में धूल फांक रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रात होते ही यह पार्क नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है। अब चुनावी सरगर्मियों के बीच जनता खुलकर सामने आने लगी है। लोग साफ कह रहे हैं कि जब शहर का इकलौता पार्क ही नहीं संभल पा रहा, तो विकास के दावे महज जुमले हैं। इस बार रोहड़ू की जनता नेताओं से वादे नहीं, जवाब चाहती है। जनता का कहना है कि वोट उसी को मिलेगा, जो इस बदहाल पार्क को संवारने की ठोस और समयबद्ध योजना देगा।
खंडहर बन चुका पार्क
पार्क में लोग सुबह-शाम घूमने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पार्क के अंदर लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। यहां महिलाओं, बच्चों के बैठने और खेलने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर परिषद का पहला पार्क अब खंडहर बन चुका है। सुरेश फोल्टा
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रोहड़ू के इकलौते पार्क में सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। इसकी कुछ दूरी पर सर्किट हाउस, रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग के एसई कार्यालय है। इसके अलावा पर्यटन निगम का होटल है। सभी बड़े नेता यहां ठहरते हैं, लेकिन पार्क की कोई सुध नहीं ले रहा है। - भगवती प्रसाद
पार्क सुंदर स्थान पर अच्छे वातावरण के बीच में जरूर बनाया गया, लेकिन यहां रात को नशेड़ी होते हैं। दिन के समय लावारिस पशु होते हैं। नगर परिषद को इस पार्क को सुधरने की खास जरूरत है। महिलाओं और बच्चों के लिए इस पार्क में कोई सुविधा नहीं है।

पार्क के अंदर दिन के समय बैठे लोग

पार्क के अंदर दिन के समय बैठे लोग

पार्क के अंदर दिन के समय बैठे लोग

पार्क के अंदर दिन के समय बैठे लोग
