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चौपाल में विकास कार्य पूरी तरह ठप : मंगलेट
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बोले-स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और परिवहन व्यवस्थाएं चरमराईं
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। चौपाल के पूर्व विधायक डॉ. सुभाष मंगलेट ने आरोप लगाया है कि विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। चुनावों के दौरान किए वादों को पूरा करने में कांग्रेस सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।
मंगलेट ने कहा कि क्षेत्र के स्कूलों में बड़ी संख्या में अध्यापकों के पद रिक्त हैं। वहीं लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग और बिजली बोर्ड सहित लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है। धरातल पर किसी भी प्रकार का विकास नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी मनमर्जी से काम कर रहे हैं और सरकार का उन पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। आम आदमी की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि चौपाल क्षेत्र में परिवहन निगम की खटारा बसें चलाई जा रही हैं। ये बसें बीच रास्ते में ही ब्रेकडाउन हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नेरवा डिपो में पहले जहां 55 बसें संचालित होती थीं, अब उनकी संख्या घटकर 45 रह गई है। इसके चलते करीब 20 रूट क्लब कर दिए गए हैं।
डॉ. मंगलेट ने बताया कि जिन रूटों पर बसें चलाई जा रही हैं, वहां अत्यधिक भीड़ रहती है। क्षमता से अधिक सवारियां होने के कारण बसें बार-बार खराब हो जाती हैं, जिसका सीधा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। इसके अलावा परिवहन निगम के नेरवा डिपो में कर्मचारियों के आधे से अधिक पद भी रिक्त हैं।
नेरवा-चौपाल-शिमला मुख्य मार्ग पर गड्ढों में केवल पत्थर और मिट्टी डालकर खानापूर्ति की जा रही है। जब मुख्य मार्ग की यह हालत है, तो संपर्क मार्गों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पूर्व विधायक ने सरकार से चौपाल विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी बंद करने और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। चौपाल के पूर्व विधायक डॉ. सुभाष मंगलेट ने आरोप लगाया है कि विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। चुनावों के दौरान किए वादों को पूरा करने में कांग्रेस सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।
मंगलेट ने कहा कि क्षेत्र के स्कूलों में बड़ी संख्या में अध्यापकों के पद रिक्त हैं। वहीं लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग और बिजली बोर्ड सहित लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है। धरातल पर किसी भी प्रकार का विकास नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी मनमर्जी से काम कर रहे हैं और सरकार का उन पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। आम आदमी की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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उन्होंने कहा कि चौपाल क्षेत्र में परिवहन निगम की खटारा बसें चलाई जा रही हैं। ये बसें बीच रास्ते में ही ब्रेकडाउन हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नेरवा डिपो में पहले जहां 55 बसें संचालित होती थीं, अब उनकी संख्या घटकर 45 रह गई है। इसके चलते करीब 20 रूट क्लब कर दिए गए हैं।
डॉ. मंगलेट ने बताया कि जिन रूटों पर बसें चलाई जा रही हैं, वहां अत्यधिक भीड़ रहती है। क्षमता से अधिक सवारियां होने के कारण बसें बार-बार खराब हो जाती हैं, जिसका सीधा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। इसके अलावा परिवहन निगम के नेरवा डिपो में कर्मचारियों के आधे से अधिक पद भी रिक्त हैं।
नेरवा-चौपाल-शिमला मुख्य मार्ग पर गड्ढों में केवल पत्थर और मिट्टी डालकर खानापूर्ति की जा रही है। जब मुख्य मार्ग की यह हालत है, तो संपर्क मार्गों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पूर्व विधायक ने सरकार से चौपाल विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी बंद करने और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
