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Rampur Bushahar News: पति को परित्याग और मानसिक क्रूरता के आधार पर मिला तलाक
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परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
एक पति को पत्नी से परित्याग और मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मिला है। रामपुर बुशहर स्थित परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश दिया है। इस दंपती का विवाह वर्ष 2013 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। इनके दो बेटे हैं। न्यायालय ने पाया कि पत्नी वर्ष 2017 में ससुराल छोड़कर चली गई। पत्नी ने स्वीकार किया कि वह पांच साल से अधिक समय से पति से अलग रह रही हैं। पत्नी ने यह भी कहा कि वह पति के साथ नहीं रहना चाहतीं। अदालत ने इसे परित्याग का स्पष्ट प्रमाण माना। अदालत ने पाया कि पत्नी ने पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना, घरेलू हिंसा के तीन मामले दर्ज करवाए थे। न्यायालय ने पाया कि ये सभी मामले पत्नी के खिलाफ तय हुए या बाद में उसने वापस ले लिए। एक मामले में पति बरी हुआ। न्यायालय ने इसे मानसिक क्रूरता का आधार माना। पत्नी ने पति पर शराबी होने और बच्चों को शराब के नशे में पीटने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पति अन्य महिलाओं को घर लाता था। हालांकि, पत्नी इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाईं। अदालत ने उनके आरोपों को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
एक पति को पत्नी से परित्याग और मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मिला है। रामपुर बुशहर स्थित परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश दिया है। इस दंपती का विवाह वर्ष 2013 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। इनके दो बेटे हैं। न्यायालय ने पाया कि पत्नी वर्ष 2017 में ससुराल छोड़कर चली गई। पत्नी ने स्वीकार किया कि वह पांच साल से अधिक समय से पति से अलग रह रही हैं। पत्नी ने यह भी कहा कि वह पति के साथ नहीं रहना चाहतीं। अदालत ने इसे परित्याग का स्पष्ट प्रमाण माना। अदालत ने पाया कि पत्नी ने पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना, घरेलू हिंसा के तीन मामले दर्ज करवाए थे। न्यायालय ने पाया कि ये सभी मामले पत्नी के खिलाफ तय हुए या बाद में उसने वापस ले लिए। एक मामले में पति बरी हुआ। न्यायालय ने इसे मानसिक क्रूरता का आधार माना। पत्नी ने पति पर शराबी होने और बच्चों को शराब के नशे में पीटने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पति अन्य महिलाओं को घर लाता था। हालांकि, पत्नी इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाईं। अदालत ने उनके आरोपों को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया।