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Rampur Bushahar News: राथल मेले में लोक कलाकारों और देवलुओं ने जमाया रंग
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पारंपकि राथल मेले के समापन अवसर पर थिरकते हुए देवलु। संवाद
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राथल मेले में लोक कलाकारों और देवलुओं ने जमाया रंग
.पारंपरिक राथल मेला रविवार को देवताओं की विदाई के साथ संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
दो दिवसीय पारंपरिक राथल मेला रविवार को देवताओं की विदाई के साथ संपन्न हो गया। इस मेले में देवता बनाड़, देशमोलिया, पवासी और गुडारू महाराज पारंपरिक रूप से उपस्थित रहे। अंतिम दिन लोक कलाकारों और देवलुओं ने नृत्य से खूब रंग जमाया। मेले के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोक गायक एसी भारद्वाज, दीवान सिवान और रोहड़ू के सुनील शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। दीवान सिवान ने जा मेरी चिट्टियें और कौंला रानिये रात बियाने जैसे कई पारंपरिक गीत गाए। सुनील शर्मा ने साशुए नाई कोरिये नाई और झुठे साजना सहित कई गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। दिनभर नाटियों का दौर चलता रहा। देवताओं के साथ आए देवलुओं ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर जमकर नृत्य किया। रविवार शाम देवताओं की विदाई के साथ ही पारंपरिक राथल मेला भी संपन्न हो गया। मेले में देवता बनाड़, देशमोलिया, पवासी और गुडारू महाराज की उपस्थिति विशेष रही। देवलुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। देवता देशमोलिया के बजीर सुरेंदर पनाटू ने बताया कि यह मेला हर वर्ष आठ व नौ अगस्त को पारंपरिक रूप से आयोजित होता है।
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.पारंपरिक राथल मेला रविवार को देवताओं की विदाई के साथ संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
दो दिवसीय पारंपरिक राथल मेला रविवार को देवताओं की विदाई के साथ संपन्न हो गया। इस मेले में देवता बनाड़, देशमोलिया, पवासी और गुडारू महाराज पारंपरिक रूप से उपस्थित रहे। अंतिम दिन लोक कलाकारों और देवलुओं ने नृत्य से खूब रंग जमाया। मेले के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोक गायक एसी भारद्वाज, दीवान सिवान और रोहड़ू के सुनील शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। दीवान सिवान ने जा मेरी चिट्टियें और कौंला रानिये रात बियाने जैसे कई पारंपरिक गीत गाए। सुनील शर्मा ने साशुए नाई कोरिये नाई और झुठे साजना सहित कई गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। दिनभर नाटियों का दौर चलता रहा। देवताओं के साथ आए देवलुओं ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर जमकर नृत्य किया। रविवार शाम देवताओं की विदाई के साथ ही पारंपरिक राथल मेला भी संपन्न हो गया। मेले में देवता बनाड़, देशमोलिया, पवासी और गुडारू महाराज की उपस्थिति विशेष रही। देवलुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। देवता देशमोलिया के बजीर सुरेंदर पनाटू ने बताया कि यह मेला हर वर्ष आठ व नौ अगस्त को पारंपरिक रूप से आयोजित होता है।

पारंपकि राथल मेले के समापन अवसर पर थिरकते हुए देवलु। संवाद