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Rampur Bushahar News: आनी की दो पंचायतों में एक साल बाद चुनाव की परंपरा कायम
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नम्होंग और जावण में 1995 में हुआ था सीमा विवाद
30 जनवरी 1997 को कराए गए चुनाव
तब से हर बार एक साल बाद होता है मतदान
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। प्रदेश में जहां पंचायतीराज चुनाव एक साथ होते हैं, वहीं आनी खंड की नम्होंग और जावण पंचायतें अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इन दोनों पंचायतों में चुनाव प्रदेश में पंचायत चुनाव के लगभग एक वर्ष बाद करवाए जाते हैं। पिछले करीब तीन दशकों से ये परंपरा बन चुकी है।
इस अनूठी व्यवस्था की पृष्ठभूमि वर्ष 1995 से जुड़ी हुई है। उस समय दिसंबर में नम्होंग और जावण पंचायतों का विभाजन किया गया था। विभाजन के बाद दोनों पंचायतों के बीच सीमा निर्धारण और गांवों के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके चलते चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
विवाद बढ़ने पर मामला न्यायालय तक पहुंचा और संबंधित पक्षों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। करीब एक वर्ष एक महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जिससे सीमा विवाद का समाधान हुआ। इसके बाद 30 जनवरी 1997 को दोनों पंचायतों में चुनाव संपन्न कराए गए।
यहीं से इन पंचायतों का चुनावी कैलेंडर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से अलग हो गया। तब से लेकर अब तक नम्होंग और जावण पंचायतों में हर बार चुनाव एक वर्ष बाद ही आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा अब स्थायी स्वरूप ले चुकी है। हर चुनावी चक्र में यही क्रम दोहराया जाता है। प्रशासन भी इसी तय समय के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। इस विशेष व्यवस्था के चलते ये पंचायतें अक्सर चर्चा में रहती हैं। क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में भी इनका अलग महत्व बना हुआ है।
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30 जनवरी 1997 को कराए गए चुनाव
तब से हर बार एक साल बाद होता है मतदान
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। प्रदेश में जहां पंचायतीराज चुनाव एक साथ होते हैं, वहीं आनी खंड की नम्होंग और जावण पंचायतें अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इन दोनों पंचायतों में चुनाव प्रदेश में पंचायत चुनाव के लगभग एक वर्ष बाद करवाए जाते हैं। पिछले करीब तीन दशकों से ये परंपरा बन चुकी है।
इस अनूठी व्यवस्था की पृष्ठभूमि वर्ष 1995 से जुड़ी हुई है। उस समय दिसंबर में नम्होंग और जावण पंचायतों का विभाजन किया गया था। विभाजन के बाद दोनों पंचायतों के बीच सीमा निर्धारण और गांवों के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके चलते चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
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विवाद बढ़ने पर मामला न्यायालय तक पहुंचा और संबंधित पक्षों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। करीब एक वर्ष एक महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जिससे सीमा विवाद का समाधान हुआ। इसके बाद 30 जनवरी 1997 को दोनों पंचायतों में चुनाव संपन्न कराए गए।
यहीं से इन पंचायतों का चुनावी कैलेंडर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से अलग हो गया। तब से लेकर अब तक नम्होंग और जावण पंचायतों में हर बार चुनाव एक वर्ष बाद ही आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा अब स्थायी स्वरूप ले चुकी है। हर चुनावी चक्र में यही क्रम दोहराया जाता है। प्रशासन भी इसी तय समय के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। इस विशेष व्यवस्था के चलते ये पंचायतें अक्सर चर्चा में रहती हैं। क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में भी इनका अलग महत्व बना हुआ है।
