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Rampur Bushahar News: बिरशी आये शांदे जे दुनिया लोग .. पर झूमे ग्रामीण
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कुमसू में धूमधाम से मनाया ठिरशू मेला
संतोष नेगी, राज ठाकुर और निकी नेगी के तरानों पर झूमे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शलाटी घोड़ी के अधिष्ठाता देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू के मंदिर परिसर में ठिरशू मेला में संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। प्राचीन एवं पारंपरिक मेले में ग्रामीणों ने स्वांग नृत्य कर समृद्ध विरासत को संजोने का संदेश दिया, वहीं लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।
मेले में मुख्य कलाकार संतोष तोशी, राज ठाकुर, आशा ठाकुर और निकी नेगी ने एक से बढ़कर प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर किया। उन्होंने पहाड़ी गीतों जैसे बिरशी आये शांदे जे दुनिया लोग, नीलू ड्राइवरा लागा नोगली मेला और डूगी आओ गे रियुणी बाती कोठियो भडारी समेत कई गीत प्रस्तुत किए, जिन पर लोग खूब थिरके।
इस दौरान स्वांग नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुति देकर भावी पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया और इसे सहेजने का संदेश दिया। मेले में सुमन चड्डा बतौर मुख्यातिथि शामिल हुईं। उनके साथ लोकिंद्र चौहान, चंद्र, शशि, अंकुश और विजेंद्र विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजक समिति ने सभी अतिथियों का जोरदार स्वागत किया।
मुख्यातिथि ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। इस मौके पर उपाध्यक्ष निशांत, सचिव सुरेश रोथला, कोषाध्यक्ष देविंद्र मेहता, स्टेज सचिव दीपक मेहता, मीडिया प्रभारी सुरेश मेहता, हरविंद्र, रंजीत मेहता और नरेश कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
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संतोष नेगी, राज ठाकुर और निकी नेगी के तरानों पर झूमे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शलाटी घोड़ी के अधिष्ठाता देवता साहिब नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू के मंदिर परिसर में ठिरशू मेला में संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। प्राचीन एवं पारंपरिक मेले में ग्रामीणों ने स्वांग नृत्य कर समृद्ध विरासत को संजोने का संदेश दिया, वहीं लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।
मेले में मुख्य कलाकार संतोष तोशी, राज ठाकुर, आशा ठाकुर और निकी नेगी ने एक से बढ़कर प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर किया। उन्होंने पहाड़ी गीतों जैसे बिरशी आये शांदे जे दुनिया लोग, नीलू ड्राइवरा लागा नोगली मेला और डूगी आओ गे रियुणी बाती कोठियो भडारी समेत कई गीत प्रस्तुत किए, जिन पर लोग खूब थिरके।
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इस दौरान स्वांग नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुति देकर भावी पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया और इसे सहेजने का संदेश दिया। मेले में सुमन चड्डा बतौर मुख्यातिथि शामिल हुईं। उनके साथ लोकिंद्र चौहान, चंद्र, शशि, अंकुश और विजेंद्र विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजक समिति ने सभी अतिथियों का जोरदार स्वागत किया।
मुख्यातिथि ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। इस मौके पर उपाध्यक्ष निशांत, सचिव सुरेश रोथला, कोषाध्यक्ष देविंद्र मेहता, स्टेज सचिव दीपक मेहता, मीडिया प्रभारी सुरेश मेहता, हरविंद्र, रंजीत मेहता और नरेश कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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