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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में दोषी को राहत नहीं, छह महीने की सजा बरकरार
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सत्र न्यायालय ने खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
18 मई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 1.65 लाख का लगाया था जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस मामले में दोषी अनिल कुमार को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
मामला वर्ष 2017 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एडीबी) पांवटा साहिब शाखा से जुड़े चेक का है। तहसील कमरऊ निवासी अनिल कुमार ने एसबीआई शाखा से छह लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। ऋण की किस्तें समय पर न चुकाने के कारण खाते में 1.50 लाख रुपये बकाया हो गए। बैंक के अनुसार बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने एक पोस्ट डेटेड चेक दिया। बाद में बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण दो बार बाउंस हो गया।
बैंक के कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2018 में न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 18 मई 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास और 1.65 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अपील में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बैंक ऋण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और नोटिस की वैध सेवा भी सिद्ध नहीं हुई।
हालांकि अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि बैंक ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया है। अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया कि बैंक प्रबंधक को शिकायत दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है और आरोपी वैधानिक अनुमान को खंडित करने में असफल रहा। इसके साथ ही अदालत ने अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।
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18 मई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 1.65 लाख का लगाया था जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस मामले में दोषी अनिल कुमार को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
मामला वर्ष 2017 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एडीबी) पांवटा साहिब शाखा से जुड़े चेक का है। तहसील कमरऊ निवासी अनिल कुमार ने एसबीआई शाखा से छह लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। ऋण की किस्तें समय पर न चुकाने के कारण खाते में 1.50 लाख रुपये बकाया हो गए। बैंक के अनुसार बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने एक पोस्ट डेटेड चेक दिया। बाद में बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण दो बार बाउंस हो गया।
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बैंक के कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2018 में न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 18 मई 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास और 1.65 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अपील में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बैंक ऋण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और नोटिस की वैध सेवा भी सिद्ध नहीं हुई।
हालांकि अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि बैंक ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया है। अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया कि बैंक प्रबंधक को शिकायत दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है और आरोपी वैधानिक अनुमान को खंडित करने में असफल रहा। इसके साथ ही अदालत ने अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।