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Sirmour News: अदालत 2
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घरेलू हिंसा केस में अतिरिक्त साक्ष्य
की मांग खारिज, रिवीजन भी फेल
- सेशन कोर्ट ने कहा, बीच में नए सबूत लाने की अनुमति नहीं, याचिका अस्वीकार्य
- मां ने बेटे और बहू पर लगाए हैं दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की मांग को लेकर दायर रिवीजन याचिका को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि ट्रायल के अंतिम चरण में नए दस्तावेज पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस संबंध में दाखिल रिवीजन याचिका भी विचार योग्य नहीं है। कानून के तहत इस तरह की याचिका अस्वीकार्य है।
पांवटा साहिब निवासी जयपाल और उनकी पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उन्हें मामले में अतिरिक्त साक्ष्य (जमाबंदी व फोटो) पेश करने की अनुमति दी जाए। यह मामला उनकी मां बग्गो देवी की ओर से घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर केस से जुड़ा है।
बग्गो देवी ने आरोप लगाया था कि बेटे और बहू ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया। साथ ही, जमीन को लेकर विवाद और प्रताड़ना की गई। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जो दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं उनका संबंध सिविल केस (जमीन विवाद) से है। घरेलू हिंसा केस में इनकी सीधी प्रासंगिकता नहीं है।
इस आधार पर अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति देने से इन्कार कर दिया गया था। उधर, अब सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसे आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। आदेश दिया कि मुख्य घरेलू हिंसा केस की सुनवाई जारी रहेगी।
संवाद
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- सेशन कोर्ट ने कहा, बीच में नए सबूत लाने की अनुमति नहीं, याचिका अस्वीकार्य
- मां ने बेटे और बहू पर लगाए हैं दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की मांग को लेकर दायर रिवीजन याचिका को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि ट्रायल के अंतिम चरण में नए दस्तावेज पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस संबंध में दाखिल रिवीजन याचिका भी विचार योग्य नहीं है। कानून के तहत इस तरह की याचिका अस्वीकार्य है।
पांवटा साहिब निवासी जयपाल और उनकी पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उन्हें मामले में अतिरिक्त साक्ष्य (जमाबंदी व फोटो) पेश करने की अनुमति दी जाए। यह मामला उनकी मां बग्गो देवी की ओर से घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर केस से जुड़ा है।
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बग्गो देवी ने आरोप लगाया था कि बेटे और बहू ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया। साथ ही, जमीन को लेकर विवाद और प्रताड़ना की गई। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जो दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं उनका संबंध सिविल केस (जमीन विवाद) से है। घरेलू हिंसा केस में इनकी सीधी प्रासंगिकता नहीं है।
इस आधार पर अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति देने से इन्कार कर दिया गया था। उधर, अब सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसे आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। आदेश दिया कि मुख्य घरेलू हिंसा केस की सुनवाई जारी रहेगी।
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