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Sirmour News: अदालत
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चेक बाउंस मामले में तीन महीने की कैद, 1.10 लाख वसूलने के भी आदेश
- अतिरिक्त सत्र अदालत का चेक बाउंस मामले में फैसला, ट्रायल कोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
- जिला के शिलाई का मामला, घरेलू जरूरत के लिए एक लाख रुपये लिए थे उधार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। दोस्ताना ऋण के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए तहसील शिलाई निवासी संजय शर्मा को तीन महीने की सजा भुगतने का आदेश दिया है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 1.10 लाख रुपये मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का दिया गया निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सही है। यह मामला जुलाई 2022 का है। वादी दलीप सिंह ने प्रतिवादी संजय शर्मा को एक लाख रुपये का दोस्ताना ऋण दिया था। उसे घरेलू काम के लिए पैसों की जरूरत थी, लेकिन प्रतिवादी ने तय समय तक रकम वापस नहीं की। सितंबर 2022 को प्रतिवादी ने ऋण को चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया। बावजूद इसके भुगतान नहीं होने पर अदालत में राशि और ब्याज की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने तथ्यों के आधार पर अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया और 26 मार्च 2025 को निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट) के फैसले को कायम रखा।
संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। दोस्ताना ऋण के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए तहसील शिलाई निवासी संजय शर्मा को तीन महीने की सजा भुगतने का आदेश दिया है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 1.10 लाख रुपये मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का दिया गया निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सही है। यह मामला जुलाई 2022 का है। वादी दलीप सिंह ने प्रतिवादी संजय शर्मा को एक लाख रुपये का दोस्ताना ऋण दिया था। उसे घरेलू काम के लिए पैसों की जरूरत थी, लेकिन प्रतिवादी ने तय समय तक रकम वापस नहीं की। सितंबर 2022 को प्रतिवादी ने ऋण को चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
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इसके बाद आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया। बावजूद इसके भुगतान नहीं होने पर अदालत में राशि और ब्याज की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने तथ्यों के आधार पर अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया और 26 मार्च 2025 को निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट) के फैसले को कायम रखा।
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