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Sirmour News: चरस तस्करी मामले में कथित अंतरराज्यीय सप्लायर की जमानत याचिका खारिज
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-पुलिस ने 5 मार्च को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्पेशल जज-1 योगेश जसवाल की अदालत ने मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी सुरेश सिंह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ मिले सबूतों को देखते हुए उसे जमानत का कोई हक नहीं है।
यह मामला 2 मार्च 2026 का है, जब पुरुवाला पुलिस थाना के तहत आने वाले सालघाटी जंगल में पुलिस टीम ने एक ऑल्टो कार को चेकिंग के लिए रोका। तलाशी के दौरान कार की ड्राइवर सीट के नीचे से 1.258 किलोग्राम चरस बरामद की गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद दो युवकों लक्ष्य नेगी और यश को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड के दौरान जब दोनों मुख्य आरोपियों से पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली गई, तो बड़ा खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि पकड़ी गई चरस उत्तराखंड के डाकपत्थर निवासी सुरेश सिंह से खरीदी गई थी।
तकनीकी सर्विलांस और टावर लोकेशन के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 मार्च 2026 को सुरेश सिंह को उत्तराखंड के तिब्बतपुर से गिरफ्तार किया। बरामद की गई चरस की मात्रा कमर्शियल (व्यावसायिक) श्रेणी में आती है। कानून के मुताबिक ऐसी स्थिति में जमानत तभी मिल सकती है जब कोर्ट पूरी तरह आश्वस्त हो कि आरोपी बेकसूर है, लेकिन इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
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बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि केवल सह-आरोपियों के बयान के आधार पर आरोपी को जेल में नहीं रखा जा सकता। हालांकि, सरकारी वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। कोर्ट ने माना कि टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स सह-आरोपियों के बयानों की पुष्टि करते हैं। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी एक अंतरराज्यीय ड्रग सप्लायर है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया गया, तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और दोबारा इस अवैध कारोबार में संलिप्त हो सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्पेशल जज-1 योगेश जसवाल की अदालत ने मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी सुरेश सिंह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ मिले सबूतों को देखते हुए उसे जमानत का कोई हक नहीं है।
यह मामला 2 मार्च 2026 का है, जब पुरुवाला पुलिस थाना के तहत आने वाले सालघाटी जंगल में पुलिस टीम ने एक ऑल्टो कार को चेकिंग के लिए रोका। तलाशी के दौरान कार की ड्राइवर सीट के नीचे से 1.258 किलोग्राम चरस बरामद की गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद दो युवकों लक्ष्य नेगी और यश को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड के दौरान जब दोनों मुख्य आरोपियों से पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली गई, तो बड़ा खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि पकड़ी गई चरस उत्तराखंड के डाकपत्थर निवासी सुरेश सिंह से खरीदी गई थी।
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तकनीकी सर्विलांस और टावर लोकेशन के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 मार्च 2026 को सुरेश सिंह को उत्तराखंड के तिब्बतपुर से गिरफ्तार किया। बरामद की गई चरस की मात्रा कमर्शियल (व्यावसायिक) श्रेणी में आती है। कानून के मुताबिक ऐसी स्थिति में जमानत तभी मिल सकती है जब कोर्ट पूरी तरह आश्वस्त हो कि आरोपी बेकसूर है, लेकिन इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि केवल सह-आरोपियों के बयान के आधार पर आरोपी को जेल में नहीं रखा जा सकता। हालांकि, सरकारी वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। कोर्ट ने माना कि टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स सह-आरोपियों के बयानों की पुष्टि करते हैं। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी एक अंतरराज्यीय ड्रग सप्लायर है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया गया, तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और दोबारा इस अवैध कारोबार में संलिप्त हो सकता है।