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Sirmour News: अदालत
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ईएसआई रिकॉर्ड नहीं दिखाने पर
कारोबारी दोषी, 10 दिन की सजा
- साल 2022 में पांवटा साहिब में एक प्रतिष्ठान का मामला, निरीक्षण के बाद भी पेश नहीं किया कर्मचारियों का रिकॉर्ड
- अदालत ने कोविड का बहाना किया खारिज, टिप्पणी में कहा; कानूनी नियमों का पालन अनिवार्य
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)।
कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) नियमों की अनदेखी करना एक कारोबारी को भारी पड़ गया। अदालत ने रिकॉर्ड पेश न करने के मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए मैसर्स मनजीत सिंह को 10 दिन की सजा और 3,000 रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। आरोपी ने श्रमिकों को नियुक्त करने के बावजूद रिकॉर्ड नहीं रखा।
यह मामला साल 2022 का है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की ओर से दायर शिकायत में बताया गया कि पांवटा साहिब क्षेत्र के एक प्रतिष्ठान का निरीक्षण 6, 21 और 28 अक्टूबर को किया गया था। इस दौरान कारोबारी आवश्यक दस्तावेज जैसे वेतन रजिस्टर, मस्टर रोल, कैश बुक, लेजर और अन्य कर्मचारी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। श्रम निरीक्षण की ओर से 13 दिसंबर 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसे आरोपी ने प्राप्त तो किया, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने निर्धारित अवधि (1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020) के रिकॉर्ड पेश नहीं किए। आरोपी ने कोविड-19 का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त कारण नहीं माना क्योंकि संबंधित अवधि में कोविड से पहले का समय भी शामिल था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने बुधवार को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 10 दिन की साधारण कैद, 3,000 रुपये जुर्माना सहित जुर्माना न देने पर 7 दिन की अतिरिक्त सजा सुनाई है। यह फैसला उन सभी कारोबारियों के लिए चेतावनी है जो कर्मचारियों से जुड़े कानूनी रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हैं।
संवाद
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कारोबारी दोषी, 10 दिन की सजा
- साल 2022 में पांवटा साहिब में एक प्रतिष्ठान का मामला, निरीक्षण के बाद भी पेश नहीं किया कर्मचारियों का रिकॉर्ड
- अदालत ने कोविड का बहाना किया खारिज, टिप्पणी में कहा
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)।
कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) नियमों की अनदेखी करना एक कारोबारी को भारी पड़ गया। अदालत ने रिकॉर्ड पेश न करने के मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए मैसर्स मनजीत सिंह को 10 दिन की सजा और 3,000 रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। आरोपी ने श्रमिकों को नियुक्त करने के बावजूद रिकॉर्ड नहीं रखा।
यह मामला साल 2022 का है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की ओर से दायर शिकायत में बताया गया कि पांवटा साहिब क्षेत्र के एक प्रतिष्ठान का निरीक्षण 6, 21 और 28 अक्टूबर को किया गया था। इस दौरान कारोबारी आवश्यक दस्तावेज जैसे वेतन रजिस्टर, मस्टर रोल, कैश बुक, लेजर और अन्य कर्मचारी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। श्रम निरीक्षण की ओर से 13 दिसंबर 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसे आरोपी ने प्राप्त तो किया, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने निर्धारित अवधि (1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020) के रिकॉर्ड पेश नहीं किए। आरोपी ने कोविड-19 का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त कारण नहीं माना क्योंकि संबंधित अवधि में कोविड से पहले का समय भी शामिल था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने बुधवार को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 10 दिन की साधारण कैद, 3,000 रुपये जुर्माना सहित जुर्माना न देने पर 7 दिन की अतिरिक्त सजा सुनाई है। यह फैसला उन सभी कारोबारियों के लिए चेतावनी है जो कर्मचारियों से जुड़े कानूनी रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हैं।
संवाद