{"_id":"69bd308b67c5cbe8930476b7","slug":"court-news-4-nahan-news-c-177-1-nhn1017-174480-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत 5","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: अदालत 5
विज्ञापन
विज्ञापन
चेक बाउंस मामले में आरोपी
दोषी करार, तीन महीने की सजा
- साल 2021 का मामला, दोषी ने बैंक से लिए थे 10 लाख रुपये, 2 लाख मुआवजा देने के भी आदेश
- न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुल मलिक ने सुनाया फैसला
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के एक मामले में अदालत ने आरोपी जगत सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक महीने के भीतर बैंक के पक्ष में 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुल मलिक ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला साल 2021 को एचपी राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, शिलाई का है। शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत को बताया कि तहसील शिलाई निवासी जगत सिंह ने सितंबर महीने में ऋण वितरण प्रणाली (एलडीएस) के उद्देश्य से 10 लाख रुपये का ऋण लिया था, लेकिन आरोपी समझौते के तहत नियमित किश्तों का भुगतान करने में विफल रहा। साल 2024 में आरोपी ने 1,80,579 रुपये बकाया राशि चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।
Trending Videos
दोषी करार, तीन महीने की सजा
- साल 2021 का मामला, दोषी ने बैंक से लिए थे 10 लाख रुपये, 2 लाख मुआवजा देने के भी आदेश
- न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुल मलिक ने सुनाया फैसला
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के एक मामले में अदालत ने आरोपी जगत सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक महीने के भीतर बैंक के पक्ष में 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुल मलिक ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला साल 2021 को एचपी राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, शिलाई का है। शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत को बताया कि तहसील शिलाई निवासी जगत सिंह ने सितंबर महीने में ऋण वितरण प्रणाली (एलडीएस) के उद्देश्य से 10 लाख रुपये का ऋण लिया था, लेकिन आरोपी समझौते के तहत नियमित किश्तों का भुगतान करने में विफल रहा। साल 2024 में आरोपी ने 1,80,579 रुपये बकाया राशि चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।