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Sirmour News: अदालत 2

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:58 PM IST
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गुरुद्वारा प्रबंधन विवाद : सदस्यता के लिए
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वसीयत जरूरी, पारिवारिक दावा नहीं चला

- गुरुद्वारा पांवटा साहिब प्रबंधन समिति में सदस्यता को लेकर चला विवाद थमा, अदालत ने पुराना फैसला रखा बरकरार

- याचिकाकर्ता ने प्रबंधक समिति के चयन को लेकर अन्य व्यक्ति की नियुक्ति को दी थी चुनौती, अपील खारिज

दीपक मेहता

नाहन (सिरमौर)।

गुरुद्वारा पांवटा साहिब प्रबंधन समिति में सदस्यता को लेकर चल रहे लंबे विवाद में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा की अदालत ने मोखम सिंह की अपील को खारिज करते हुए 22 फरवरी 2025 के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति के सदस्य बनने के लिए केवल पारिवारिक दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए वैध वसीयत का होना आवश्यक है।

मामला गुरुद्वारा पांवटा साहिब की प्रबंधक समिति के सदस्य के चयन को लेकर है। अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह अपने पिता गुरदयाल सिंह की वसीयत के आधार पर समिति के सदस्य बनने के हकदार हैं। वहीं, प्रबंधन समिति ने करमवीर सिंह को सदस्य नियुक्त किया था। इस नियुक्ति को अदालत में चुनौती दी गई थी। अदालत ने फैसले में कहा कि मोखम सिंह की ओर से पेश की गई वसीयत कानूनी रूप से साबित नहीं हो सकी। बलदेव सिंह की वसीयत के अनुसार करमवीर सिंह का नाम सामने आया। इसलिए उनका दावा अधिक मजबूत माना गया।
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इसके अलावा अदालत में 9 अगस्त 2013 में पास किया गया प्रस्ताव प्रक्रिया के खिलाफ माना गया, इसलिए उसे अवैध घोषित किया गया, लेकिन इससे मोखम सिंह को सदस्यता का अधिकार नहीं मिल सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर सदस्य अपने उत्तराधिकारी को खुद नामित करेगा। इस फैसले से साफ हो गया कि गुरुद्वारा प्रबंधन में सदस्यता का अधिकार केवल पारिवारिक दावे से नहीं, बल्कि वैध वसीयत और कानूनी प्रक्रिया से तय होगा।
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