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Sirmour News: शहीद कुलविंदर सिंह के नाम से चल रहे स्कूल को बंद करने के आदेश
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एक अप्रैल से स्कूल में लग जाएगा ताला, कारगिल शहीद के अभिभावकों और ग्रामीणों में रोष
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। गिरिनगर विद्युत परियोजना की ओर से संचालित किए जा रहे शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल पाठशाला को आगामी अप्रैल से बंद करने के आदेश जारी हुए हैं। इससे शहीद के परिजनों में भारी रोष है। शहीद के परिजन इस फैसले को शहीद का अपमान बता रहे हैं। बता दें कि वर्ष 1978 में स्कूल को गिरि विद्युत परियोजना ने गिरि पावर हाउस के निर्माण के समय शुरू किया था ताकि परियोजना के निर्माण में लगे सैकड़ों कर्मचारियों के बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण कर सकें। यहां के आसपास माजरी, डोईयोंवाला, पडदूणी, खंबानगर आदि गांवों के बच्चे भी शिक्षा प्राप्त करते हैं। 1990 के दशक में सरकार ने पाठशाला का दर्जा बढ़ा दिया। इससे यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को दसवीं की पढ़ाई करने दूरदराज जाने से राहत मिली। पाठशाला में कुल आठ अध्यापक बोर्ड की तरफ से नियुक्त किए गए हैं जबकि चार अध्यापक सरकार ने नियुक्त किए हैं। बोर्ड ने पाठशाला को सरकार से अधीन लेने की मांग भी उठाई है। सरकार को आवेदन देकर अवगत करवाया गया है। सरकार ने इस विषय पर कोई जवाब नहींं दिया है। पता चला है कि हाल ही में दसवीं की परीक्षा देने के बाद अप्रैल में शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल पाठशाला में ताला लग जाएगा।
इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। इस फैसले के बाद शहीद के परिवार में भी काफी रोष है। शहीद के पिता ज्ञान चंद, माता सकुंतला, भाई राज कुमार, जोगिंदर सिंह का कहना है कि शहीद के नाम पर चल रहे स्कूल को बंद करने का फैसला शहीद का अपमान है। उन्होंने बताया कि 2000 के दशक में कारगिल युद्ध में शहीद कुलविंदर सिंह ने शहादत पाई थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने पाठशाला का नामकरण शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल किया था। उधर, विद्युत बोर्ड के आरई अशोक रुपता ने बताया कि पाठशाला बंद करने को लेकर आदेश जारी हो गए हैं। एक अप्रैल से पाठशाला में ताला लगा दिया जाएगा।
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धौलाकुआं (सिरमौर)। गिरिनगर विद्युत परियोजना की ओर से संचालित किए जा रहे शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल पाठशाला को आगामी अप्रैल से बंद करने के आदेश जारी हुए हैं। इससे शहीद के परिजनों में भारी रोष है। शहीद के परिजन इस फैसले को शहीद का अपमान बता रहे हैं। बता दें कि वर्ष 1978 में स्कूल को गिरि विद्युत परियोजना ने गिरि पावर हाउस के निर्माण के समय शुरू किया था ताकि परियोजना के निर्माण में लगे सैकड़ों कर्मचारियों के बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण कर सकें। यहां के आसपास माजरी, डोईयोंवाला, पडदूणी, खंबानगर आदि गांवों के बच्चे भी शिक्षा प्राप्त करते हैं। 1990 के दशक में सरकार ने पाठशाला का दर्जा बढ़ा दिया। इससे यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को दसवीं की पढ़ाई करने दूरदराज जाने से राहत मिली। पाठशाला में कुल आठ अध्यापक बोर्ड की तरफ से नियुक्त किए गए हैं जबकि चार अध्यापक सरकार ने नियुक्त किए हैं। बोर्ड ने पाठशाला को सरकार से अधीन लेने की मांग भी उठाई है। सरकार को आवेदन देकर अवगत करवाया गया है। सरकार ने इस विषय पर कोई जवाब नहींं दिया है। पता चला है कि हाल ही में दसवीं की परीक्षा देने के बाद अप्रैल में शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल पाठशाला में ताला लग जाएगा।
इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। इस फैसले के बाद शहीद के परिवार में भी काफी रोष है। शहीद के पिता ज्ञान चंद, माता सकुंतला, भाई राज कुमार, जोगिंदर सिंह का कहना है कि शहीद के नाम पर चल रहे स्कूल को बंद करने का फैसला शहीद का अपमान है। उन्होंने बताया कि 2000 के दशक में कारगिल युद्ध में शहीद कुलविंदर सिंह ने शहादत पाई थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने पाठशाला का नामकरण शहीद कुलविंदर सिंह मेमोरियल किया था। उधर, विद्युत बोर्ड के आरई अशोक रुपता ने बताया कि पाठशाला बंद करने को लेकर आदेश जारी हो गए हैं। एक अप्रैल से पाठशाला में ताला लगा दिया जाएगा।
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