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Sirmour News: कफोटा पशु अस्पताल में डॉक्टर न होने पर भड़के ग्रामीण
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पशु पालन विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर जताया रोष
क्षेत्र की 24 पंचायतों के हजारों पशुपालक झेल रहे परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। कफोटा में पशुपालन विभाग के अस्पताल में लंबे समय से पशु चिकित्सक की तैनाती न होने से नाराज ग्रामीणों ने वीरवार को विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पशुपालकों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त दवाइयां, जिसके चलते उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1980 में स्थापित इस पशु अस्पताल के अधीन तिलोरधार विकास खंड की करीब 24 पंचायतें आती हैं। हजारों पशुपालक अपने पशुओं के इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। वर्तमान में यहां केवल एक फार्मासिस्ट तैनात है, जो पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहा है। वहीं डेपुटेशन पर दूसरे अस्पतालों में सेवाएं दे रहा है। पशुपालकों का कहना है कि फार्मासिस्ट को गांव-गांव जाकर पशुओं का उपचार और टीकाकरण भी करना पड़ता है। ऐसे में जब वह क्षेत्र में होता है तो अस्पताल खाली रहता है, जिससे दूरदराज के गांवों से आने वाले लोगों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है। इस समस्या को लेकर कई बार सरकार और विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है।
स्थानीय ग्रामीण दिनेश शर्मा, बस्ती राम, गंगा राम, सुमेर चंद और कुंदन सिंह ने कहा कि जब पशु बीमार होते हैं तो अस्पताल में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाइयां, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। सरकार इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे क्षेत्र के पशुपालकों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पशुपालन विभाग सिरमौर की उपनिदेशक डॉ. रेणु सलारिया ने बताया कि कफोटा अस्पताल में डॉक्टर का पद रिक्त है, जिसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। डॉक्टर की तैनाती का निर्णय विभाग और सरकार के स्तर पर लिया जाता है। उम्मीद है जल्द यहां डॉक्टर की तैनाती होगी और लोगों को जरूरी सेवाएं मिलेंगी। संवाद
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क्षेत्र की 24 पंचायतों के हजारों पशुपालक झेल रहे परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। कफोटा में पशुपालन विभाग के अस्पताल में लंबे समय से पशु चिकित्सक की तैनाती न होने से नाराज ग्रामीणों ने वीरवार को विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पशुपालकों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त दवाइयां, जिसके चलते उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1980 में स्थापित इस पशु अस्पताल के अधीन तिलोरधार विकास खंड की करीब 24 पंचायतें आती हैं। हजारों पशुपालक अपने पशुओं के इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। वर्तमान में यहां केवल एक फार्मासिस्ट तैनात है, जो पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहा है। वहीं डेपुटेशन पर दूसरे अस्पतालों में सेवाएं दे रहा है। पशुपालकों का कहना है कि फार्मासिस्ट को गांव-गांव जाकर पशुओं का उपचार और टीकाकरण भी करना पड़ता है। ऐसे में जब वह क्षेत्र में होता है तो अस्पताल खाली रहता है, जिससे दूरदराज के गांवों से आने वाले लोगों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है। इस समस्या को लेकर कई बार सरकार और विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है।
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स्थानीय ग्रामीण दिनेश शर्मा, बस्ती राम, गंगा राम, सुमेर चंद और कुंदन सिंह ने कहा कि जब पशु बीमार होते हैं तो अस्पताल में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाइयां, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। सरकार इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे क्षेत्र के पशुपालकों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पशुपालन विभाग सिरमौर की उपनिदेशक डॉ. रेणु सलारिया ने बताया कि कफोटा अस्पताल में डॉक्टर का पद रिक्त है, जिसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। डॉक्टर की तैनाती का निर्णय विभाग और सरकार के स्तर पर लिया जाता है। उम्मीद है जल्द यहां डॉक्टर की तैनाती होगी और लोगों को जरूरी सेवाएं मिलेंगी। संवाद