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Sirmour News: अदालत 2, खास खबर..

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:58 PM IST
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वन भूमि कब्जा मामला : सेशन कोर्ट
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ने कहा, मामला सुनवाई योग्य ही नहीं
- पांवटा साहिब में अतिक्रमण मामले में निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार, राज्य की अपील खारिज
- कानूनी प्रक्रिया पर बड़ा फैसला, कोर्ट ने टिप्पणी में कहा, अपील हाईकोर्ट जाने योग्य
- यह मामला भविष्य के सामान मामलों के लिए साबित होगा नजीर
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के चर्चित वन भूमि अतिक्रमण मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने राज्य की अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही आरोपी राम किशन को ट्रायल कोर्ट से मिली राहत बरकरार रही। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित धाराओं के तहत दायर यह अपील सेशन कोर्ट में सुनवाई योग्य नहीं थी। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में अपील सीधे हाईकोर्ट में दायर की जानी चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी को भविष्य के समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।
यह प्रकरण पांवटा साहिब क्षेत्र का है। साल 2016 में वन विभाग ने आरोप लगाया था कि राम किशन ने करीब 1-14 बीघा (0.143 हेक्टेयर) आरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर पक्का मकान बना लिया और खेती शुरू कर दी। मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 447 और भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले की सुनवाई के बाद 29 अगस्त 2024 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था। अदालत ने फैसले में एफआईआर दर्ज करने में देरी और भूमि के सीमांकन को प्रमाणित न होने को प्रमुख आधार माना था।
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अब राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज था, वे जमानती हैं और ऐसे मामलों में अपील का अधिकार सीधे सेशन कोर्ट में नहीं बनता। इस आधार पर अपील को अमान्य मानते हुए खारिज कर दिया गया। सेशन कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार के पास विकल्प है कि वह इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे।
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यह है पूरा मामला
रेंज वन अधिकारी ने 25 अप्रैल 2016 को पुलिस चौकी माजरा में राम किशन के विरुद्ध एक शिकायत दी थी। आरोप लगाया कि आरोपी ने वन भूमि पर अतिक्रमण किया है। यह भी बताया गया है कि भूमि का सीमांकन कर क्षति रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके परिणामस्वरूप, यह शिकायत एफआईआर दर्ज करने के लिए पांवटा साहिब थाना को भेजी गई थी। जांच पूरी होने के बाद मामले को साबित करने के लिए 7 गवाहों की जांच की, लेकिन साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को बरी कर दिया था।
संवाद
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