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Sirmour News: मेडिकल कॉलेज में पीएमआर विशेषज्ञ डॉ. चाहत बंसल ने संभाला कार्यभार
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क्रॉनिक दर्द, कमर-गर्दन दर्द, पैरालिसिस और रीढ़ की चोट के मरीजों को मिल रहा विशेष उपचार
पुनर्वास, फिजिकल थेरेपी, कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों के उपयोग पर भी मिल रहा मार्गदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग को नई विशेषज्ञ चिकित्सक मिल गई हैं। फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन में एमडी डिग्रीधारी डॉ. चाहत बंसल ने मेडिकल कॉलेज में सेवाएं शुरू कर दी हैं। उनके आने से लंबे समय से पुराने दर्द, विकलांगता, रीढ़ की हड्डी की चोट और पैरालिसिस जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
डॉ. चाहत बंसल ने बताया कि फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग मुख्य रूप से उन मरीजों के उपचार और पुनर्वास पर कार्य करता है, जो लंबे समय से क्रॉनिक दर्द या शारीरिक अक्षमता की समस्या से जूझ रहे हैं। विभाग में जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द, मांसपेशियों की समस्याएं तथा अन्य लंबे समय तक रहने वाली दर्द संबंधी बीमारियों का उपचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी में चोट लगने वाले मरीजों, पैरालिसिस से प्रभावित लोगों और विभिन्न प्रकार की विकलांगताओं से जूझ रहे मरीजों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे मरीजों को केवल दवाइयां ही नहीं दी जातीं, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि वे अपनी दैनिक जिंदगी को बेहतर तरीके से कैसे संचालित कर सकते हैं।
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डॉ. बंसल ने बताया विभाग में मरीजों को उनकी स्थिति के अनुरूप विशेष व्यायाम और फिजिकल थेरेपी की जानकारी दी जा रही है। जिन मरीजों को विशेष जूते, ऑर्थोटिक उपकरण, हाथ-पैरों के सहायक उपकरण या अन्य सहायक साधनों की आवश्यकता होती है, उन्हें उसके संबंध में भी मार्गदर्शन और सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जिन लोगों के हाथ या पैर किसी दुर्घटना अथवा अन्य कारणों से नहीं हैं, उन्हें कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेसिस) के उपयोग और चयन के बारे में जानकारी दी जा रही है।
-- -इनसेट
क्या है फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) को फिजियाट्री भी कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो शारीरिक अक्षमता, लंबे समय तक रहने वाले दर्द, रीढ़ की हड्डी की चोट, पैरालिसिस, मांसपेशियों और नसों से जुड़ी बीमारियों तथा दुर्घटनाओं के बाद मरीजों को पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटाने का कार्य करती है। इस विभाग का उद्देश्य केवल रोग का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज की शारीरिक क्षमता, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
पुनर्वास, फिजिकल थेरेपी, कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों के उपयोग पर भी मिल रहा मार्गदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग को नई विशेषज्ञ चिकित्सक मिल गई हैं। फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन में एमडी डिग्रीधारी डॉ. चाहत बंसल ने मेडिकल कॉलेज में सेवाएं शुरू कर दी हैं। उनके आने से लंबे समय से पुराने दर्द, विकलांगता, रीढ़ की हड्डी की चोट और पैरालिसिस जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
डॉ. चाहत बंसल ने बताया कि फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग मुख्य रूप से उन मरीजों के उपचार और पुनर्वास पर कार्य करता है, जो लंबे समय से क्रॉनिक दर्द या शारीरिक अक्षमता की समस्या से जूझ रहे हैं। विभाग में जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द, मांसपेशियों की समस्याएं तथा अन्य लंबे समय तक रहने वाली दर्द संबंधी बीमारियों का उपचार किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी में चोट लगने वाले मरीजों, पैरालिसिस से प्रभावित लोगों और विभिन्न प्रकार की विकलांगताओं से जूझ रहे मरीजों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे मरीजों को केवल दवाइयां ही नहीं दी जातीं, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि वे अपनी दैनिक जिंदगी को बेहतर तरीके से कैसे संचालित कर सकते हैं।
डॉ. बंसल ने बताया विभाग में मरीजों को उनकी स्थिति के अनुरूप विशेष व्यायाम और फिजिकल थेरेपी की जानकारी दी जा रही है। जिन मरीजों को विशेष जूते, ऑर्थोटिक उपकरण, हाथ-पैरों के सहायक उपकरण या अन्य सहायक साधनों की आवश्यकता होती है, उन्हें उसके संबंध में भी मार्गदर्शन और सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जिन लोगों के हाथ या पैर किसी दुर्घटना अथवा अन्य कारणों से नहीं हैं, उन्हें कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेसिस) के उपयोग और चयन के बारे में जानकारी दी जा रही है।
क्या है फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) को फिजियाट्री भी कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो शारीरिक अक्षमता, लंबे समय तक रहने वाले दर्द, रीढ़ की हड्डी की चोट, पैरालिसिस, मांसपेशियों और नसों से जुड़ी बीमारियों तथा दुर्घटनाओं के बाद मरीजों को पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटाने का कार्य करती है। इस विभाग का उद्देश्य केवल रोग का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज की शारीरिक क्षमता, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।