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Sirmour News: जिले में मेगा मॉक ड्रिल, आठ स्थानों पर आपदा से निपटने का किया अभ्यास

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 11:42 PM IST
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Mega mock drill in the district; disaster response exercises conducted at eight locations.
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान अपनी जिम्मेदारी निभाती सम्बंधित विभागों
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भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, भवन ध्वस्त और वनाग्नि जैसी परिस्थितियों में बचाव कार्यों को परखा

संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन/कालाअंब/राजगढ़ /संगड़ाह। (सिरमौर)। आपदा प्रबंधन की तैयारियों और विभागों के बीच समन्वय को परखने के लिए सोमवार को जिले में मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिले के सभी उपमंडलों में आठ अलग-अलग स्थानों पर भूकंप, बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़, भवन ध्वस्त होने और वनाग्नि जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
जिला प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विभागों के सहयोग से आयोजित अभ्यास में कालाअंब के रुचिरा पेपर्स मिल में आग लगने और भूकंप से क्षति, बनेठी क्षेत्र में रात्रिकालीन वनाग्नि, पच्छाद के एसवीएन कॉलोनी सराहां में भवन ध्वस्त होने जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया।
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इसके अलावा राजगढ़ के शिरगुल मार्केट चौक में भवन गिरने, पांवटा साहिब के सिरमौरी ताल क्षेत्र में भूस्खलन, शिलाई के टिंबी क्षेत्र में बाढ़ और भवन ध्वस्त होने, कफोटा के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सतौन में भवन गिरने और आग लगने तथा संगड़ाह की पुरानी तहसील रेणुकाजी में भवन ध्वस्त होने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
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ड्रिल के दौरान खोज एवं बचाव अभियान, घायलों को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने, राहत शिविर स्थापित करने, प्रभावित लोगों के पुनर्वास, संचार व्यवस्था बहाल करने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।
इस अभ्यास में पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत बोर्ड, पंचायती राज संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और अन्य विभागों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभ्यास में 2,500 मृतकों, 18,000 घायलों, 6,000 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने और 1.50 लाख लोगों के बेघर होने की काल्पनिक स्थिति को आधार बनाकर राहत एवं बचाव तैयारियों का आकलन किया गया।
कार्यकारी उपायुक्त सिरमौर एलआर वर्मा ने कहा कि इस तरह के अभ्यास वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल से मिले अनुभवों और सुझावों के आधार पर जिला आपदा प्रबंधन योजना को और प्रभावी बनाया जाएगा।
उन्होंने विभागों और आम नागरिकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता और विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है। भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास आयोजित किए जाते रहेंगे।
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