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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में दोषी को भुगतनी होगी एक साल की सजा
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30 जनवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने दोषी को सुनाई थी सजा और 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदे
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए जिला सोलन के कंडाघाट निवासी विशाल की अपील खारिज करते हुए उसे सजा भुगतने का आदेश दिया है। न्यायाधीश योगेश जसवाल ने फैसले में निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास और 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा।
यह मामला साल 2023 को राजगढ़ क्षेत्र का है। तहसील पच्छाद निवासी नरेश कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मार्च महीने में विशाल ने निजी जरूरत बताकर उससे 2.25 लाख रुपये उधार लिए थे और चार माह में लौटाने का भरोसा दिया था। बाद में आरोपी ने 15 जुलाई 2023 को 2.25 लाख रुपये का चेक दिया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह अपर्याप्त टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद शिकायत अदालत में दायर की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 जनवरी 2026 को आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की कैद और 2.50 लाख रुपये मुआवजा तथा मुआवजा अदा न करने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई थी।
अब इस फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। आरोपी ने दलील दी कि चेक शिकायतकर्ता को नहीं दिया गया था, बल्कि ट्रक यूनियन के पास जमा कराया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। बचाव पक्ष ने एक गवाह भी पेश किया, लेकिन अदालत ने उसके बयान को विरोधाभासी और अविश्वसनीय माना। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने न तो चेक के कथित दुरुपयोग की कोई शिकायत दर्ज कराई और न ही बैंक को भुगतान रोकने के निर्देश दिए। सत्र न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि चेक लेनदेन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में निवारक सजा आवश्यक है। इसलिए 30 जनवरी 2026 को निचली अदालत की ओर से दी गई सजा और मुआवजे की राशि में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए जिला सोलन के कंडाघाट निवासी विशाल की अपील खारिज करते हुए उसे सजा भुगतने का आदेश दिया है। न्यायाधीश योगेश जसवाल ने फैसले में निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास और 2.50 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा।
यह मामला साल 2023 को राजगढ़ क्षेत्र का है। तहसील पच्छाद निवासी नरेश कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मार्च महीने में विशाल ने निजी जरूरत बताकर उससे 2.25 लाख रुपये उधार लिए थे और चार माह में लौटाने का भरोसा दिया था। बाद में आरोपी ने 15 जुलाई 2023 को 2.25 लाख रुपये का चेक दिया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह अपर्याप्त टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद शिकायत अदालत में दायर की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 जनवरी 2026 को आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की कैद और 2.50 लाख रुपये मुआवजा तथा मुआवजा अदा न करने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई थी।
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अब इस फैसले के खिलाफ दोषी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। आरोपी ने दलील दी कि चेक शिकायतकर्ता को नहीं दिया गया था, बल्कि ट्रक यूनियन के पास जमा कराया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। बचाव पक्ष ने एक गवाह भी पेश किया, लेकिन अदालत ने उसके बयान को विरोधाभासी और अविश्वसनीय माना। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने न तो चेक के कथित दुरुपयोग की कोई शिकायत दर्ज कराई और न ही बैंक को भुगतान रोकने के निर्देश दिए। सत्र न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि चेक लेनदेन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में निवारक सजा आवश्यक है। इसलिए 30 जनवरी 2026 को निचली अदालत की ओर से दी गई सजा और मुआवजे की राशि में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
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