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Sirmour News: सिरमौर में गेहूं खरीद केंद्रों का निदेशक ने किया निरीक्षण

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:58 PM IST
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wheat purchaging center dhaulakunwa checking
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-खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशक राम कुमार गौतम ने जांची व्यवस्थाएं
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- निरीक्षण के दौरान किसानों की फसल विपणन से जुड़ी समस्याओं को भी सुना
-गेहूं खरीद का लक्ष्य 35,000 मीट्रिक टन, अब तक 11,000 की हुई खरीद : गौतम
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब/धौलाकुआं (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशक आरके गौतम ने बुधवार को पांवटा साहिब व धौलाकुआं गेहूं खरीद केंद्र का निरीक्षण किया। निदेशक ने प्रदेश में चल रही गेहूं खरीद प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में गेहूं खरीद का लक्ष्य 35,000 मीट्रिक टन रखा गया है। अब तक लगभग 11,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह पिछले वर्ष के 2,425 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 160 रुपये की वृद्धि है। गेहूं की खरीद 30 मार्च से 15 जून तक की जा रही है। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याओं को भी सुना और अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।
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उन्होंने बताया कि किसानों को एचपीएपीपीपीडॉटएनआईसीडॉटइन पोर्टल पर जाकर अपनी फसल का ब्योरा भरने के बाद किसानों का गेहूं की फसल बेचने के लिए पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के लिए विभाग का पोर्टल खोल दिया गया है। प्रदेश के किसान खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाने के बाद किसानों को गेहूं की फसल बेचने के लिए टोकन नंबर और तिथि बताई जाएगी। पोर्टल पर बताई गई तिथि के अनुसार किसान गेहूं खरीद केंद्र में जाकर टोकन नंबर के साथ अपनी फसल बेच पाएंगे।
मंडियों में किसानों के लिए पीने के पानी, बैठने के लिए शेड, बिजली और भंडारण की पुख्ता व्यवस्था की गई है। एमडी ने आश्वासन दिया कि फसल खरीद के 48 घंटों के भीतर किसानों के बैंक खातों में ऑनलाइन माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। विशेष रूप से पांवटा साहिब मंडी को ‘ऑल वेदर’ (हर मौसम के अनुकूल) मंडी बताया गया है, जहां बारिश या धूप से फसल को नुकसान नहीं होगा।
सरकार किसानों को उनकी फसल का उचित दाम देने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों से अपील है कि वे अपनी फसल निजी व्यापारियों के बजाय सरकारी केंद्रों पर ही लाएं ताकि उन्हें एमएसपी का पूरा लाभ मिल सके।
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