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Solan News: वाशिंग पाउडर बनाने वाली कंपनी के कामगार ने तीसरे दिन भी किया प्रदर्शन
Sun, 09 Aug 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:58 PM IST
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कंपनी ने कामगारों के लिए गेट किया बंद, 50 से अधिक कामगार हुए बेरोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला(सोलन)। काठा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक वॉशिंग पाउडर बनाने वाले उद्योग में प्रबंधन की ओर से की गई तालाबंदी के बाद तीसरे दिन भी कामगारों ने गेट पर नारेबाजी की। कंपनी बंद होने से 50 से अधिक कामगार बेरोजगार हो गए हैं। निकाले गए कामगारों में अधिक हिमाचली हैं। रविवार को निकाले गए कामगारों ने कंपनी के गेट पर प्रदर्शन कर संचालकों के खिलाफ नारेबाजी की।
कामगारों ने बताया कि वह पिछले 9 साल से इस कंपनी में काम कर रहे हैं। लेकिन उसे अचानक बिना कोई कारण बताए कंपनी से निकाल दिया है। उन्हें अभी तक बोनस भी नहीं मिला है। इस उम्र में अब वह कहां जाएंगे। वहीं कंपनी का सुपरवाइजर सतीश कुमार ने बताया कि वह दस साल से इस कंपनी में कामगार रहे हैं इस बार किसी भी कामगार का वेतन नहीं बढ़ा जिस पर उन्होंने प्रबंधन से बात की लेकिन उन्हें कोई आश्वासन नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने श्रम अधिकारी को अपनी समस्या को लेकर मांग पत्र सौंपा जिसकी सुनवाई 12 अगस्त को रखी गई थी लेकिन मांग पत्र सौंपने के बाद उनके खातों में पैसा डाल दिया गया जब वह कंपनी पहुंचे तो गेट बंद था। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कामगारों को उनका हक दिलाया जाए और तानाशाही तरीके से कामगार को बाहर के रास्ता दिखाना उचित नहीं है।
इंटक फेडरेशन के प्रदेश महासचिव हरबंस राणा ने इस कार्रवाई को निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि बिना पूर्व सूचना के कर्मचारियों को निकालना श्रम कानूनों का उल्लंघन है। राणा ने आरोप लगाया कि हिमाचली कर्मचारियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
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उधर, कंपनी के संचालकों का कहना है कि उनकी कंपनी दूसरी कंपनी के लिए जॉब वर्क करती थी। उक्त कंपनी की ओर से टेंडर समाप्त कर दिया है जिसके चलते वह कंपनी को चालू नहीं रख सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला(सोलन)। काठा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक वॉशिंग पाउडर बनाने वाले उद्योग में प्रबंधन की ओर से की गई तालाबंदी के बाद तीसरे दिन भी कामगारों ने गेट पर नारेबाजी की। कंपनी बंद होने से 50 से अधिक कामगार बेरोजगार हो गए हैं। निकाले गए कामगारों में अधिक हिमाचली हैं। रविवार को निकाले गए कामगारों ने कंपनी के गेट पर प्रदर्शन कर संचालकों के खिलाफ नारेबाजी की।
कामगारों ने बताया कि वह पिछले 9 साल से इस कंपनी में काम कर रहे हैं। लेकिन उसे अचानक बिना कोई कारण बताए कंपनी से निकाल दिया है। उन्हें अभी तक बोनस भी नहीं मिला है। इस उम्र में अब वह कहां जाएंगे। वहीं कंपनी का सुपरवाइजर सतीश कुमार ने बताया कि वह दस साल से इस कंपनी में कामगार रहे हैं इस बार किसी भी कामगार का वेतन नहीं बढ़ा जिस पर उन्होंने प्रबंधन से बात की लेकिन उन्हें कोई आश्वासन नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने श्रम अधिकारी को अपनी समस्या को लेकर मांग पत्र सौंपा जिसकी सुनवाई 12 अगस्त को रखी गई थी लेकिन मांग पत्र सौंपने के बाद उनके खातों में पैसा डाल दिया गया जब वह कंपनी पहुंचे तो गेट बंद था। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कामगारों को उनका हक दिलाया जाए और तानाशाही तरीके से कामगार को बाहर के रास्ता दिखाना उचित नहीं है।
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इंटक फेडरेशन के प्रदेश महासचिव हरबंस राणा ने इस कार्रवाई को निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि बिना पूर्व सूचना के कर्मचारियों को निकालना श्रम कानूनों का उल्लंघन है। राणा ने आरोप लगाया कि हिमाचली कर्मचारियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
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उधर, कंपनी के संचालकों का कहना है कि उनकी कंपनी दूसरी कंपनी के लिए जॉब वर्क करती थी। उक्त कंपनी की ओर से टेंडर समाप्त कर दिया है जिसके चलते वह कंपनी को चालू नहीं रख सकते हैं।