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Solan News: श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की महिमा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
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कुनिहार में आयोजित श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा के दौरान मौजूद भक्तगण। स्रोत : आयोजक
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एकादशी व्रत के महत्व की भी दी जानकारी
तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़े लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम कुनिहार में सात दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं संत सम्मेलन में श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संगम देखने को मिला। आचार्य भगत राम नड्डा ने द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्री मल्लिकार्जुन महादेव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने शिव के करुणामय, त्यागमय और भक्तवत्सल स्वरूप की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में दूसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। नड्डा ने बताया कि गणेश और कार्तिकेय के विवाह को लेकर हुई प्रतियोगिता में गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर उन्हें समस्त सृष्टि का स्वरूप माना। उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनका विवाह पहले करा दिया। यह जानकर भगवान कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर तपस्या करने चले गए। पुत्र को मनाने पहुंचे भगवान शिव और माता पार्वती के प्रयास के बावजूद जब कार्तिकेय नहीं माने तो शिव ने वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर सदैव निवास करने का संकल्प लिया। यही स्थान आज श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
आयोजक मुकेश शर्मा ने बताया कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा जारी रहेगी। प्रतिदिन दोपहर होने वाली कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म और अध्यात्म से आत्मसाथ हो रहे हैं।
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तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़े लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम कुनिहार में सात दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं संत सम्मेलन में श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संगम देखने को मिला। आचार्य भगत राम नड्डा ने द्वितीय ज्योतिर्लिंग श्री मल्लिकार्जुन महादेव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने शिव के करुणामय, त्यागमय और भक्तवत्सल स्वरूप की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में दूसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। नड्डा ने बताया कि गणेश और कार्तिकेय के विवाह को लेकर हुई प्रतियोगिता में गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर उन्हें समस्त सृष्टि का स्वरूप माना। उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनका विवाह पहले करा दिया। यह जानकर भगवान कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर तपस्या करने चले गए। पुत्र को मनाने पहुंचे भगवान शिव और माता पार्वती के प्रयास के बावजूद जब कार्तिकेय नहीं माने तो शिव ने वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर सदैव निवास करने का संकल्प लिया। यही स्थान आज श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
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आयोजक मुकेश शर्मा ने बताया कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा जारी रहेगी। प्रतिदिन दोपहर होने वाली कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म और अध्यात्म से आत्मसाथ हो रहे हैं।
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