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Solan News: डीएचएमयू ट्रेनसेट अब अंधड़ व बारिश बनी बाधा, रेडिएटर में फंसे पत्ते-टहनियां
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बारिश में हुए ट्रायल में आई दिक्कतें, कई जगह रोकना पड़ा ट्रेनसेट
साफ मौसम में 28 की स्पीड में ट्रायल हुए सफल, हीट भी नहीं ले रहा
वीरवार को भी आरडीएसओ टीम ने किया ट्रायल, समरहिल तक हुई जांच
आदित्य सोफत
सोलन। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट (डीएचएमयू) ट्रेन सेट में इंजन के हीट की समस्या दूर होने के बाद अब बारिश और अंधड़ बाधा बन गई है। अगर ट्रेन सेट को बारिश और तूफान में चलाया जा रहा है तो कूलिंग के लिए लगे रेडियेटर में टहनियां और पत्ते फंस रहे हैं। इस कारण ट्रेन सेट को रोकना भी पड़ रहा है। बीते दिनों मौसम खराब में हुए ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट में कई दिक्कतें आई। ऐसे में ट्रेन सेट को स्टेशनों के बीच कई जगहों में रोकना भी पड़ा। हालांकि, साफ मौसम में ट्रेन सेट 28 की स्पीड में 4.7 टन वजन के साथ चलाया ट्रायल किया जा रहा है। ये ट्रायल सफल भी हो रहे हैं, लेकिन अब नई समस्या चुनौती बन गई है। वीरवार को भी कालका से समरहिल रेलवे स्टेशन तक डीएचएमयू ट्रेन सेट का ट्रायल किया। इस दौरान अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम ने स्पीड समेत अन्य चीजों की जांच की। इसी के साथ बोगी के डिजाइन, मानकीकरण, परीक्षण और तकनीकी का भी पता लगाया है। ये ट्रायल 23 जनवरी से हो रहे हैं। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट तैयार करने के बाद रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद ही आगामी फैसले होने हैं, लेकिन इससे पहले अब रेडियेटर में तूफान और बारिश में आ रही दिक्कतों को दूर करना होगा।
2024 में ट्रायल को हो गए थे फेल
गौर रहे कि डीएचएमयू ट्रेन सेट को इसी वर्ष शुरू करने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से ट्रायल करवाए जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2024 में भी ट्रायल हुए थे, लेकिन ट्रेन सेट टकसाल की चढ़ाई न चढ़ पाने और गर्म होने के कारण ट्रायल फेल हो गए थे। इसे दुरुस्त कर 2025 में फिर ट्रायल शुरू किए गए और इंजन हीट न ले इसे लेकर रेडियेटर लगाए गए थे। रेडिएटर बाहरी हवा को खींच कर इंजन को कूलिंग करते थे, लेकिन अब रेडियेटर हवा के कारण टहनियां व पत्ते अपनी ओर खींच रहा है। तेज हवा, अंधड़ और बारिश में इससे परेशानी आ रही है।
कोट
एचएमयू के रेडिएटर में तेज हवा और बारिश के कारण आ रही तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर किया जाएगा। इसी को लेकर ट्रायल चले हैं। पूरी तरह से सही होने पर ही ट्रेनसेट को ट्रैक पर उतारा जाएगा। तकनीकी और कंपनी की टीम भी ट्रेनसेट में ट्रायल के दौरान मौजूद है।
- विनोद भाटिया, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला
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साफ मौसम में 28 की स्पीड में ट्रायल हुए सफल, हीट भी नहीं ले रहा
वीरवार को भी आरडीएसओ टीम ने किया ट्रायल, समरहिल तक हुई जांच
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सोलन। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट (डीएचएमयू) ट्रेन सेट में इंजन के हीट की समस्या दूर होने के बाद अब बारिश और अंधड़ बाधा बन गई है। अगर ट्रेन सेट को बारिश और तूफान में चलाया जा रहा है तो कूलिंग के लिए लगे रेडियेटर में टहनियां और पत्ते फंस रहे हैं। इस कारण ट्रेन सेट को रोकना भी पड़ रहा है। बीते दिनों मौसम खराब में हुए ट्रायल के दौरान ट्रेन सेट में कई दिक्कतें आई। ऐसे में ट्रेन सेट को स्टेशनों के बीच कई जगहों में रोकना भी पड़ा। हालांकि, साफ मौसम में ट्रेन सेट 28 की स्पीड में 4.7 टन वजन के साथ चलाया ट्रायल किया जा रहा है। ये ट्रायल सफल भी हो रहे हैं, लेकिन अब नई समस्या चुनौती बन गई है। वीरवार को भी कालका से समरहिल रेलवे स्टेशन तक डीएचएमयू ट्रेन सेट का ट्रायल किया। इस दौरान अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम ने स्पीड समेत अन्य चीजों की जांच की। इसी के साथ बोगी के डिजाइन, मानकीकरण, परीक्षण और तकनीकी का भी पता लगाया है। ये ट्रायल 23 जनवरी से हो रहे हैं। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट तैयार करने के बाद रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद ही आगामी फैसले होने हैं, लेकिन इससे पहले अब रेडियेटर में तूफान और बारिश में आ रही दिक्कतों को दूर करना होगा।
2024 में ट्रायल को हो गए थे फेल
गौर रहे कि डीएचएमयू ट्रेन सेट को इसी वर्ष शुरू करने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से ट्रायल करवाए जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2024 में भी ट्रायल हुए थे, लेकिन ट्रेन सेट टकसाल की चढ़ाई न चढ़ पाने और गर्म होने के कारण ट्रायल फेल हो गए थे। इसे दुरुस्त कर 2025 में फिर ट्रायल शुरू किए गए और इंजन हीट न ले इसे लेकर रेडियेटर लगाए गए थे। रेडिएटर बाहरी हवा को खींच कर इंजन को कूलिंग करते थे, लेकिन अब रेडियेटर हवा के कारण टहनियां व पत्ते अपनी ओर खींच रहा है। तेज हवा, अंधड़ और बारिश में इससे परेशानी आ रही है।
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कोट
एचएमयू के रेडिएटर में तेज हवा और बारिश के कारण आ रही तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर किया जाएगा। इसी को लेकर ट्रायल चले हैं। पूरी तरह से सही होने पर ही ट्रेनसेट को ट्रैक पर उतारा जाएगा। तकनीकी और कंपनी की टीम भी ट्रेनसेट में ट्रायल के दौरान मौजूद है।
- विनोद भाटिया, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला