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Solan News: सेब को रोगों से बचाने के लिए मैदान में उतरेंगी विशेषज्ञ टीमें
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अल्टरनेरिया और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच पर काबू के लिए नौणी विवि का जागरूकता अभियान कल से
शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा एवं मंडी जिलों की आठ टीमें करेंगी जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय सेब में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए 10 से 16 फरवरी तक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगा। यह अभियान उन सेब उत्पादक क्षेत्रों में चलाया जाएगा, जिन्हें इन रोगों की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील पाया गया है।
हाल के वर्षों में अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोग सेब उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। इन रोगों के कारण समय से पहले पत्तियां झड़ जाती हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रदेश के कई बागानों में मौजूद आर्द्र वातावरण इन रोगों की पुनरावृत्ति के लिए अनुकूल माना जाता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से आठ विशेषज्ञ टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों में नौणी स्थित मुख्य परिसर के वैज्ञानिकों के साथ-साथ मशोबरा, बजौरा और शारबो (किन्नौर) स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों के अलावा शिमला, सोलन, चंबा और किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक शामिल हैं। बागवानी विभाग के अधिकारी भी इन टीमों में शामिल होंगे।
ये टीमें क्षेत्र भ्रमण, किसान संवाद और स्थल-आधारित प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान और अनुशंसित प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूक करेंगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य इन रोगों के रोग चक्र को तोड़ना और सेब उत्पादन को सुरक्षित करना है।
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शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा एवं मंडी जिलों की आठ टीमें करेंगी जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विश्वविद्यालय सेब में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए 10 से 16 फरवरी तक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगा। यह अभियान उन सेब उत्पादक क्षेत्रों में चलाया जाएगा, जिन्हें इन रोगों की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील पाया गया है।
हाल के वर्षों में अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच रोग सेब उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। इन रोगों के कारण समय से पहले पत्तियां झड़ जाती हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रदेश के कई बागानों में मौजूद आर्द्र वातावरण इन रोगों की पुनरावृत्ति के लिए अनुकूल माना जाता है।
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इस चुनौती से निपटने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से आठ विशेषज्ञ टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों में नौणी स्थित मुख्य परिसर के वैज्ञानिकों के साथ-साथ मशोबरा, बजौरा और शारबो (किन्नौर) स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों के अलावा शिमला, सोलन, चंबा और किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक शामिल हैं। बागवानी विभाग के अधिकारी भी इन टीमों में शामिल होंगे।
ये टीमें क्षेत्र भ्रमण, किसान संवाद और स्थल-आधारित प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान और अनुशंसित प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूक करेंगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य इन रोगों के रोग चक्र को तोड़ना और सेब उत्पादन को सुरक्षित करना है।