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पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन : 14 बार टल चुकी है टेंडर की तारीख, अब 25 मार्च पर टिकीं नजरें
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बद्दी -नालागढ फोरलेन की खस्ताहालत- संवाद
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फोरलेन की लागत भी कई गुना तक बढ़ गई, उद्यमियों और आम जनता को झेलनी पड़ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) की लाइफलाइन कहे जाने वाले पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन का काम अधर में लटका हुआ है। एनएचएआई की सुस्ती और टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी ने क्षेत्र के उद्यमियों और आम जनता की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि पिछले छह महीनों में 14 बार टेंडर की तिथि बदली जा चुकी है। अब विभाग ने 25 मार्च को टेंडर खोलने का नया दावा किया है। इससे पहले 19 मार्च को इसकी तिथि तय की गई थी। करीब चार साल पहले एनएचएआई ने गुजरात की पटेल कंपनी को 469 करोड़ रुपये में इस फोरलेन का जिम्मा सौंपा था। कंपनी को 30 महीने का समय मिला था, जिसे बाद में एक साल और बढ़ाया गया। इसके बावजूद कंपनी महज 42 फीसदी काम ही पूरा कर पाई और 6 जून को काम बीच में ही छोड़कर चली गई। 11 सितंबर 2025 को नया टेंडर लगाया गया, जिसकी सरकारी कीमत उस समय 557 करोड़ थी। इसके बाद लगातार तारीखें टलती रहीं। पहले यह टेंडर 14 अक्तूबर, 17 नवंबर, 24 व 27 नवंबर, 12 व 19 दिसंबर, 28 दिसंबर, 12 जनवरी, 29 जनवरी, 12 व 20 फरवरी, 28 फरवरी, 12 व 19 मार्च को खुलने थे, लेकिन अब 25 मार्च को तिथि निर्धारित की गई है।
लागत बढ़ी, पर काम नहीं हुआ शुरू
पुरानी कंपनी के जाने के बाद 11 सितंबर 2025 को नए सिरे से टेंडर लगाए गए। तब से लेकर अब तक तारीखों का खेल जारी है। टेंडर की शुरुआती लागत 557 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 670 करोड़ तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब इसे संशोधित कर 600 करोड़ के करीब लाया गया है।
बर्बाद सड़कें और लंबी दूरी का चक्कर
बरसात के दौरान इस मार्ग की हालत इतनी खस्ता हो गई थी कि पंचकूला जाने वाले मालवाहक ट्रकों को वाया नालागढ़-रूपनगर होकर जाना पड़ा। इससे न केवल समय की बर्बादी हुई, बल्कि उद्यमियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार और एनएचएआई इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
कोट
फोरलेन के टेंडर खोलने की तिथि अब 25 मार्च निर्धारित की गई है। प्रोजेक्ट की लागत को संतुलित करते हुए इसे 600 करोड़ रुपये तक लाया गया है।- असलम खान, प्रोजेक्ट प्रभारी, एनएचएआई
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बद्दी (सोलन)। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) की लाइफलाइन कहे जाने वाले पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन का काम अधर में लटका हुआ है। एनएचएआई की सुस्ती और टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी ने क्षेत्र के उद्यमियों और आम जनता की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि पिछले छह महीनों में 14 बार टेंडर की तिथि बदली जा चुकी है। अब विभाग ने 25 मार्च को टेंडर खोलने का नया दावा किया है। इससे पहले 19 मार्च को इसकी तिथि तय की गई थी। करीब चार साल पहले एनएचएआई ने गुजरात की पटेल कंपनी को 469 करोड़ रुपये में इस फोरलेन का जिम्मा सौंपा था। कंपनी को 30 महीने का समय मिला था, जिसे बाद में एक साल और बढ़ाया गया। इसके बावजूद कंपनी महज 42 फीसदी काम ही पूरा कर पाई और 6 जून को काम बीच में ही छोड़कर चली गई। 11 सितंबर 2025 को नया टेंडर लगाया गया, जिसकी सरकारी कीमत उस समय 557 करोड़ थी। इसके बाद लगातार तारीखें टलती रहीं। पहले यह टेंडर 14 अक्तूबर, 17 नवंबर, 24 व 27 नवंबर, 12 व 19 दिसंबर, 28 दिसंबर, 12 जनवरी, 29 जनवरी, 12 व 20 फरवरी, 28 फरवरी, 12 व 19 मार्च को खुलने थे, लेकिन अब 25 मार्च को तिथि निर्धारित की गई है।
लागत बढ़ी, पर काम नहीं हुआ शुरू
पुरानी कंपनी के जाने के बाद 11 सितंबर 2025 को नए सिरे से टेंडर लगाए गए। तब से लेकर अब तक तारीखों का खेल जारी है। टेंडर की शुरुआती लागत 557 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 670 करोड़ तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब इसे संशोधित कर 600 करोड़ के करीब लाया गया है।
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बर्बाद सड़कें और लंबी दूरी का चक्कर
बरसात के दौरान इस मार्ग की हालत इतनी खस्ता हो गई थी कि पंचकूला जाने वाले मालवाहक ट्रकों को वाया नालागढ़-रूपनगर होकर जाना पड़ा। इससे न केवल समय की बर्बादी हुई, बल्कि उद्यमियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार और एनएचएआई इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
कोट
फोरलेन के टेंडर खोलने की तिथि अब 25 मार्च निर्धारित की गई है। प्रोजेक्ट की लागत को संतुलित करते हुए इसे 600 करोड़ रुपये तक लाया गया है।- असलम खान, प्रोजेक्ट प्रभारी, एनएचएआई