{"_id":"697bbb61b5be6300020ff903","slug":"tenders-for-the-pinjore-nalagarh-four-lane-project-could-not-be-opened-even-for-the-tenth-time-in-five-months-solan-news-c-176-1-ssml1044-162198-2026-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: पांच महीने में दसवीं बार भी नहीं खुल पाए पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: पांच महीने में दसवीं बार भी नहीं खुल पाए पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के टेंडर
विज्ञापन
बद्दी –नालागढ़ फोरलेन पर रेड लाईट चौक के समीप भरा पानी- संवाद।
विज्ञापन
अब 12 फरवरी निर्धारित की तारीख, 670 करोड़ पहुंची निर्माण कार्य लागत
बार-बार तिथियां बढ़ने से लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन को जोड़ने वाले पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के टेंडर पांच माह बीतने के बाद भी नहीं खुल पाए हैं। इस अवधि में अब तक 10 बार टेंडर खोलने की तिथियां तय की गईं, लेकिन हर बार तिथि आगे बढ़ा दी गई। 29 जनवरी को टेंडर खुलने थे, लेकिन इस दिन भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब निर्माण कार्य की लागत 670 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। इससे क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। बीबीएन क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के कारण केंद्र सरकार की ओर से जानबूझकर टेंडर प्रक्रिया को टाला जा रहा है। बार-बार तिथियां बढ़ने से उद्योगों और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तीन वर्ष पहले एनएचएआई ने पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन निर्माण का ठेका गुजरात की पटेल कंपनी को 469 करोड़ रुपये में दिया था। कंपनी को 30 माह का समय दिया गया। तय समय पूरा होने के बाद एक वर्ष का अतिरिक्त समय भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कंपनी केवल 42 प्रतिशत कार्य ही पूरा कर सकी। बरसात के दौरान सड़क की हालत इतनी खराब हो गई थी कि पंचकूला जाने वाले ट्रक चालकों को नालागढ़ होकर जाना पड़ा। पटेल कंपनी ने 6 जून को काम छोड़ दिया। इसके बाद 11 अगस्त को नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए। टेंडर 31 अक्तूबर को खुलने थे, उस समय इसकी अनुमानित लागत 557 करोड़ रुपये थी, लेकिन 31 अक्तूबर को टेंडर नहीं खुले और तिथि 14 नवंबर तय की गई। इसके बाद 17 नवंबर, 24 नवंबर, 27 नवंबर, 12 दिसंबर, 19 दिसंबर, 28 दिसंबर, 12 जनवरी और 29 जनवरी को भी टेंडर नहीं खुल पाए। अब अगली तिथि 12 फरवरी निर्धारित की गई है। इस बीच परियोजना की लागत बढ़कर 670 करोड़ रुपये हो गई है।
गड्ढों में तबदील हुआ फोरलेन
पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन की हालत अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इस मार्ग पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है। रोजाना हादसे हो रहे हैं और वाहनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बद्दी से नालागढ़ तक 17 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बरसात के दौरान पानी निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है।
कोट
कुछ औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण टेंडर नहीं खुल पाए हैं। उन्होंने बताया कि अब परियोजना की लागत 670 करोड़ रुपये हो चुकी है। 29 जनवरी को टेंडर खुलने थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब अगली तिथि 12 फरवरी निर्धारित की गई है।
असलम खान,प्रोजेक्ट प्रभारी,एनएचएआई
Trending Videos
बार-बार तिथियां बढ़ने से लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन को जोड़ने वाले पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के टेंडर पांच माह बीतने के बाद भी नहीं खुल पाए हैं। इस अवधि में अब तक 10 बार टेंडर खोलने की तिथियां तय की गईं, लेकिन हर बार तिथि आगे बढ़ा दी गई। 29 जनवरी को टेंडर खुलने थे, लेकिन इस दिन भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब निर्माण कार्य की लागत 670 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। इससे क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। बीबीएन क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के कारण केंद्र सरकार की ओर से जानबूझकर टेंडर प्रक्रिया को टाला जा रहा है। बार-बार तिथियां बढ़ने से उद्योगों और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तीन वर्ष पहले एनएचएआई ने पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन निर्माण का ठेका गुजरात की पटेल कंपनी को 469 करोड़ रुपये में दिया था। कंपनी को 30 माह का समय दिया गया। तय समय पूरा होने के बाद एक वर्ष का अतिरिक्त समय भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कंपनी केवल 42 प्रतिशत कार्य ही पूरा कर सकी। बरसात के दौरान सड़क की हालत इतनी खराब हो गई थी कि पंचकूला जाने वाले ट्रक चालकों को नालागढ़ होकर जाना पड़ा। पटेल कंपनी ने 6 जून को काम छोड़ दिया। इसके बाद 11 अगस्त को नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए। टेंडर 31 अक्तूबर को खुलने थे, उस समय इसकी अनुमानित लागत 557 करोड़ रुपये थी, लेकिन 31 अक्तूबर को टेंडर नहीं खुले और तिथि 14 नवंबर तय की गई। इसके बाद 17 नवंबर, 24 नवंबर, 27 नवंबर, 12 दिसंबर, 19 दिसंबर, 28 दिसंबर, 12 जनवरी और 29 जनवरी को भी टेंडर नहीं खुल पाए। अब अगली तिथि 12 फरवरी निर्धारित की गई है। इस बीच परियोजना की लागत बढ़कर 670 करोड़ रुपये हो गई है।
गड्ढों में तबदील हुआ फोरलेन
पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन की हालत अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इस मार्ग पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है। रोजाना हादसे हो रहे हैं और वाहनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बद्दी से नालागढ़ तक 17 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बरसात के दौरान पानी निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोट
कुछ औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण टेंडर नहीं खुल पाए हैं। उन्होंने बताया कि अब परियोजना की लागत 670 करोड़ रुपये हो चुकी है। 29 जनवरी को टेंडर खुलने थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब अगली तिथि 12 फरवरी निर्धारित की गई है।
असलम खान,प्रोजेक्ट प्रभारी,एनएचएआई