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Solan News: छावशा पीएचसी में डॉक्टर का पद खाली, 20 गांवों के लोग रामभरोसे
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छावशा में ईलाज के लिए पहुंचे लोग। संवाद
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मरीजों को इंजेक्शन तक लगवाने के लिए जाना पड़ रहा कंडाघाट अस्पताल
डॉक्टर के डेपुटेशन पर जाने से लोगों को झेलनी पड़ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन/कंडाघाट। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल के गृह क्षेत्र छावशा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सक का पद लंबे समय से रिक्त है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अन्य पीएचसी में लोगों को कैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही होंगी। छावशा पीएचसी में चार पंचायतों के लगभग 20 गांवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। रोजाना यहां लगभग तीन दर्जन ओपीडी होती हैं, लेकिन चिकित्सक की गैरमौजूदगी के कारण मरीजों को इलाज के लिए कंडाघाट, सोलन, शोघी या शिमला तक जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से चिकित्सक को डेपुटेशन पर अन्य जगह भेजा गया है। जब इस विषय में पूछा जाता है, तो बताया जाता है कि उनकी अन्य जगहों पर ड्यूटी लगी है। कई बार स्वास्थ्य केंद्र का अन्य स्टाफ भी छुट्टी पर चला जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। मरीज अकसर इंजेक्शन और अन्य प्राथमिक उपचार के लिए पीएचसी पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक न होने के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने मांग उठाई कि या तो छावशा में नियमित चिकित्सक तैनात किया जाए, अन्यथा पीएचसी को बंद करने पर विचार किया जाए।
कोट
छावशा से चिकित्सक को आपातकालीन ड्यूटी के कारण डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है। चिकित्सकों से अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं ली जा रही हैं। जल्द ही छावशा में रेगुलर चिकित्सक की तैनाती की जाएगी, ताकि लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन
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डॉक्टर के डेपुटेशन पर जाने से लोगों को झेलनी पड़ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन/कंडाघाट। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल के गृह क्षेत्र छावशा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सक का पद लंबे समय से रिक्त है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अन्य पीएचसी में लोगों को कैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही होंगी। छावशा पीएचसी में चार पंचायतों के लगभग 20 गांवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। रोजाना यहां लगभग तीन दर्जन ओपीडी होती हैं, लेकिन चिकित्सक की गैरमौजूदगी के कारण मरीजों को इलाज के लिए कंडाघाट, सोलन, शोघी या शिमला तक जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से चिकित्सक को डेपुटेशन पर अन्य जगह भेजा गया है। जब इस विषय में पूछा जाता है, तो बताया जाता है कि उनकी अन्य जगहों पर ड्यूटी लगी है। कई बार स्वास्थ्य केंद्र का अन्य स्टाफ भी छुट्टी पर चला जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। मरीज अकसर इंजेक्शन और अन्य प्राथमिक उपचार के लिए पीएचसी पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक न होने के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने मांग उठाई कि या तो छावशा में नियमित चिकित्सक तैनात किया जाए, अन्यथा पीएचसी को बंद करने पर विचार किया जाए।
कोट
छावशा से चिकित्सक को आपातकालीन ड्यूटी के कारण डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है। चिकित्सकों से अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं ली जा रही हैं। जल्द ही छावशा में रेगुलर चिकित्सक की तैनाती की जाएगी, ताकि लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
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डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन