सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Trauma center open for four years, doors to treatment shut.

Solan News: -अभियान-5- चार साल से खुला ट्राॅमा सेंटर, इलाज के दरवाजे बंद

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
Trauma center open for four years, doors to treatment shut.
नालागढ़ अस्पताल में बना ट्रॉमा सेंटर – संवाद।
विज्ञापन
-अभियान-5-

न पर्याप्त चिकित्सक, न ही विशेषज्ञ किए तैनात
नालागढ़ अस्पताल बना रेफरल केंद्र, मरीजों को भेजा जा रहा दूसरे अस्पताल
औद्योगिक क्षेत्र आए दिन होती हैं दुर्घटनाएं
एचआर धीमान

नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के मुख्य अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर चार साल पहले शुरू हो पाया है लेकिन इलाज के लिए इसके दरवाजे अभी भी बंद हैं। उद्घाटन के चार साल बाद भी सेंटर में न तो पर्याप्त स्टाफ और न ही मशीनरी संचालन के लिए विशेषज्ञ तैनात हो पाए हैं। इसके चलते अस्पताल प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर में आई ओटी शुरू कर दी है।
औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां ट्रॉमा सेंटर स्थापित किया था। पर्याप्त स्टाफ न होने से गंभीर मरीजों को अभी भी रेफर किया जा रहा है। ट्रॉमा सेंटर शुरू करवाने के लिए स्थानीय जनता लंबे समय से मांग कर रही है। इसका इतिहास राजनीतिक घोषणाओं और देरी से जुड़ा रहा है। वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इसे दोबारा शुरू करने की घोषणा की। घोषणा पर अमल हुआ और 61.95 लाख से ट्रॉमा सेंटर का भवन तैयार किया गया। सितंबर 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसका उद्घाटन किया, लेकिन धरातल पर यह शुरू नहीं हो सका।
विज्ञापन

उद्घाटन के बाद भी पिछले चार वर्षों से यह केंद्र बंद है। यहां न तो आवश्यक मशीनरी है और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर और स्टाफ तैनात किए गए। सरकार बदलने के बाद भी नया स्टाफ नहीं मिल पाया। अस्पताल प्रशासन ने लाखों रुपये की लागत से बने इस सेंटर में वर्तमान में नेत्र ओटी शुरू कर दी है। चिकित्सालय में 16 पदों में से 10 पद ही भरे हैं। छह खाली पदों में पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों के हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, सर्जन और चर्म रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
केस स्टडी-1
21 जून को बगलेहड़ निवासी रणजीत सिंह को पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। वे सुबह 10:00 बजे अस्पताल पहुंचे थे। पेट से संबंधित कई जरूरी जांचें होनी थीं, लेकिन करीब आधे घंटे बाद उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया।
केस स्टडी-2
ढांग उपरली के हरि सिंह को 22 जून को सांस लेने में परेशानी के चलते शाम 8:00 बजे नालागढ़ अस्पताल लाया गया। फेफड़ों से संबंधित जांच की सुविधा न होने के कारण उन्हें सेक्टर-32 चंडीगढ़ अस्पताल रेफर कर दिया गया।
केस स्टडी-3
बघेरी के धर्मबीर को कुछ दिन पहले दुर्घटना के बाद सुबह 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उनका एमआरआई, सीटी स्कैन सहित कई जांचें होनी थीं, लेकिन उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया।
वर्ष 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन कर दिया था, लेकिन यहां स्टाफ और मशीनरी उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके कारण यह अभी तक शुरू नहीं हो सका है। विभाग ने इस सेंटर में नेत्र ओटी शुरू कर दी है। जैसे ही स्टाफ उपलब्ध करवाया जाएगा, ट्रॉमा सेंटर तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. कविराज, बीएमओ नालागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed