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Solan News: मालरोड पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं व्यंजन भा रहे लोगों को
Sat, 08 Aug 2026 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:24 PM IST
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पतीड़ का सीजन शुरू; फ्राइड और स्टीम पतीड़ लोगों की पहली पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर में स्थानीय व्यंजनों की महक बिखेरने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने मालरोड पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट स्टॉल लगाए हैं। अरबी के पत्तों का सीजन शुरू होते ही अब महिलाओं ने मालरोड पर पारंपरिक व्यंजन पतीड़ बनाकर बेचना शुरू कर दिया है, जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।
महिलाएं मौके पर ही पतीड़ को स्टीम और फ्राई करके ताज़ा परोस रही हैं। स्वयं सहायता समूह ''बंधन'' की ओर से स्टॉल चलाने वाली आशा भारद्वाज ने बताया कि बाजार में अरबी के पत्ते उपलब्ध होते ही उन्होंने पतीड़ बनाना शुरू किया। स्टॉल पर 50 रुपये में पतीड़ के 3 पीस पुदीने और मिर्च की चटनी के साथ दिए जा रहे हैं। पतीड़ के अलावा स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के घरेलू अचार भी बेचे जा रहे हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं घरों में अचार तैयार करती हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाता है। इसके साथ ही मालरोड पर मक्की की रोटी, माल-पुड़े, सिड्डू और अन्य हिमाचली व्यंजन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि हफ्ते में दो दिन लगने वाले इन स्टॉलों से उन्हें आजीविका का अच्छा जरिया मिल रहा है और साथ ही क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर में स्थानीय व्यंजनों की महक बिखेरने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने मालरोड पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट स्टॉल लगाए हैं। अरबी के पत्तों का सीजन शुरू होते ही अब महिलाओं ने मालरोड पर पारंपरिक व्यंजन पतीड़ बनाकर बेचना शुरू कर दिया है, जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।
महिलाएं मौके पर ही पतीड़ को स्टीम और फ्राई करके ताज़ा परोस रही हैं। स्वयं सहायता समूह ''बंधन'' की ओर से स्टॉल चलाने वाली आशा भारद्वाज ने बताया कि बाजार में अरबी के पत्ते उपलब्ध होते ही उन्होंने पतीड़ बनाना शुरू किया। स्टॉल पर 50 रुपये में पतीड़ के 3 पीस पुदीने और मिर्च की चटनी के साथ दिए जा रहे हैं। पतीड़ के अलावा स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के घरेलू अचार भी बेचे जा रहे हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं घरों में अचार तैयार करती हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाता है। इसके साथ ही मालरोड पर मक्की की रोटी, माल-पुड़े, सिड्डू और अन्य हिमाचली व्यंजन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि हफ्ते में दो दिन लगने वाले इन स्टॉलों से उन्हें आजीविका का अच्छा जरिया मिल रहा है और साथ ही क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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