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हिमाचल: नयना देवी मंदिर में बंदर से बचने के प्रयास में जालंधर के श्रद्धालु की गिरकर मौत

Wed, 05 Aug 2026 10:39 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Aug 2026 10:39 PM IST
सार

प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर में बुधवार शाम को हुए एक दर्दनाक हादसे में पंजाब के जालंधर निवासी कपड़ा व्यापारी विजय गुप्ता की मौत हो गई।

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Textile merchant from Jalandhar dies after falling while trying to escape a monkey at Shri Naina Devi Temple
बंदर से बचने के प्रयास में गिरकर श्रद्धालु की माैत(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी मंदिर में बुधवार शाम को हुए एक दर्दनाक हादसे में पंजाब के जालंधर निवासी कपड़ा व्यापारी विजय गुप्ता की मौत हो गई। पत्नी के साथ माता के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचे थे। मंदिर परिसर में एक बंदर के झपटने पर उससे बचने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़े। गिरने से उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए सिविल अस्पताल घवांडल ले गए, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार विजय गुप्ता जालंधर में कपड़े का कारोबार करते थे और धार्मिक यात्रा पर परिवार के साथ श्री नयना देवी जी आए थे। 

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मंदिर परिसर में अचानक झपट पड़ा बंदर
दर्शन के दौरान मंदिर परिसर में अचानक एक बंदर उन पर झपट पड़ा। बंदर से बचने के प्रयास में वह असंतुलित होकर गिर गए। हादसा इतना गंभीर था कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम सहित अन्य कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। इस घटना ने एक बार फिर श्री नयना देवी जी मंदिर परिसर में बढ़ते बंदरों के आतंक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बंदरों की बढ़ती संख्या उनके लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बंदर कई बार श्रद्धालुओं के हाथों से प्रसाद, पर्स, मोबाइल और अन्य सामान छीन लेते हैं।

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बंदरों से सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को
कई अवसरों पर वे श्रद्धालुओं पर झपट भी पड़ते हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बना रहता है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती है। हादसे ने घवांडल स्थित सिविल अस्पताल की सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खोल दी है। उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल श्री नयना देवी जी में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन निकटतम सरकारी अस्पताल में आज भी शवगृह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, शव को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर तक नहीं है।

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पुराने भवन में आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
ऐसे में किसी अप्रिय घटना के बाद परिजनों और प्रशासन को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल का नया भवन लंबे समय से निर्माणाधीन है, लेकिन बजट की कमी के चलते निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। पुराने भवन में आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के कई पद भी लंबे समय से खाली हैं। यदि क्षेत्र में कोई बड़ा हादसा हो जाए तो गंभीर रूप से घायलों को तत्काल बेहतर उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए घवांडल अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। साथ ही शवगृह, फ्रीजर, विशेषज्ञ चिकित्सकों और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था के साथ नए अस्पताल भवन का निर्माण जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

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