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Una News: दियोली गांव में ऑनलाइन परिवार सूची बनाने के लिए लगा दिए 10 दिन
Tue, 14 Jul 2026 06:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 14 Jul 2026 06:54 AM IST
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घनारी (ऊना)। एक ओर सरकारें घर-घर डिजिटल सेवाएं देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों की सुविधा के लिए खोले गए लोक मित्र केंद्र भी पंचायत स्तर पर व्याप्त सुस्त कार्यप्रणाली और अधिकारियों की उदासीनता से जूझ रहे हैं। तहसील घनारी के दियोली गांव में ऐसा ही मामला सामने आया है।
एक लोक मित्र केंद्र संचालक ने तीन जुलाई को एक परिवार की परिवार सूची तैयार करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि 12 जुलाई तक भी संबंधित पंचायत सचिव द्वारा आवेदन को अप्रूव नहीं किया गया। जब लोक मित्र केंद्र संचालक ने पंचायत सचिव से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो पहले कई बार फोन तक नहीं उठाया गया। बाद में संपर्क होने पर केवल इतना कह दिया गया कि मैं बाहर हूं। लोगों ने कहा कि यह जवाब दर्शाता है कि आम जनता के समय और परेशानियों को कितना महत्त्व दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब एक साधारण ऑनलाइन आवेदन को मंजूरी देने में दस दिन से अधिक का समय लग रहा है तो न जाने आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सरकारी कार्यों में लोगों को कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को राहत देना है लेकिन यदि कर्मचारी समय पर कार्य ही नहीं करेंगे तो पूरी व्यवस्था केवल दिखावा बनकर रह जाएगी। आवेदक मनोज और क्षेत्रवासियों राजीव, सुरेश, चंद्रशेखर, किरण सहित अन्य ने संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा सरकारी सेवाओं में अनावश्यक देरी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। इस संबंध में बीडीओ गगरेट सुरेंद्र जेटली ने कहा कि मामला ध्यान में आया है, जल्द ही परिवार सूची को अप्रूवल दे दी जाएगी।
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एक लोक मित्र केंद्र संचालक ने तीन जुलाई को एक परिवार की परिवार सूची तैयार करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि 12 जुलाई तक भी संबंधित पंचायत सचिव द्वारा आवेदन को अप्रूव नहीं किया गया। जब लोक मित्र केंद्र संचालक ने पंचायत सचिव से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो पहले कई बार फोन तक नहीं उठाया गया। बाद में संपर्क होने पर केवल इतना कह दिया गया कि मैं बाहर हूं। लोगों ने कहा कि यह जवाब दर्शाता है कि आम जनता के समय और परेशानियों को कितना महत्त्व दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब एक साधारण ऑनलाइन आवेदन को मंजूरी देने में दस दिन से अधिक का समय लग रहा है तो न जाने आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सरकारी कार्यों में लोगों को कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को राहत देना है लेकिन यदि कर्मचारी समय पर कार्य ही नहीं करेंगे तो पूरी व्यवस्था केवल दिखावा बनकर रह जाएगी। आवेदक मनोज और क्षेत्रवासियों राजीव, सुरेश, चंद्रशेखर, किरण सहित अन्य ने संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा सरकारी सेवाओं में अनावश्यक देरी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। इस संबंध में बीडीओ गगरेट सुरेंद्र जेटली ने कहा कि मामला ध्यान में आया है, जल्द ही परिवार सूची को अप्रूवल दे दी जाएगी।
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