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Una News: कंचन ने जंगल में उगने वाली बगड़ घास को बनाया स्वरोजगार का माध्यम

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 10 Jun 2026 07:55 AM IST
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Kanchan has made the Bagad grass growing in the forest a means of self-employment.
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नारी (ऊना)। महिलाएं जब घर से बाहर निकल कर किसी कार्यक्रम में शामिल होती हैं या किसी प्रदर्शनी का अवलोकन करती हैं तो वहां से कुछ न कुछ ज्ञान हासिल जरूर कर लेती हैं। इसी का एक उदाहरण लठियाणी क्षेत्र से कंचन बाला ने जंगलों में उगने वाली बगड़ घास को ही अपने स्वरोजगार का माध्यम बना लिया है। कंचन ने अपने साथ 10 महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है। कंचन बगड़ घास के द्वारा विभिन्न प्रकार के खिलौने, डेकोरेशन का सामान, घरों में इस्तेमाल होने वाली छावडियां तथा बेटियों के दहेज में दी जाने वाली टोकरियां बनाकर घर का खर्च निकाल रही हैं।

जानकारी अनुसार बगड़ घास के उत्पाद बनाने में घास काट कर लाने की मेहनत, कुछ रंगों का इस्तेमाल और सुइयां और मोटे धागे का प्रयोग होता है। सबसे विशेष बात उत्पाद बनाने की कला आनी चाहिए। छावड़ियां साइज के अनुसार 50 से 100 रुपये तक, डेकोरेशन की वस्तुएं 100 से 150 रुपये और सितारे, शीशे तथा छोटे घुंघरू लगी हुए डेकोरेशन वस्तुएं लगभग 200 रुपये के हिसाब से ऑनलाइन भी सेल की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन उत्पादों की शहरी लोग घर आकर खरीद कर रहे हैं। कंचन बाला का कहना है कि मेहनत और लगन का यह कार्य हमारे लिए वरदान सिद्ध हुआ है। इसके द्वारा हमने घर बैठे ही रोजगार हासिल किया है। कंचन बाला का कहना है कि उत्पाद बनाने में उनके साथ 10 अन्य महिलाएं भी सहायता करती हैं और लगभग 8,000 रुपये प्रति महीना कमाना शुरू कर दिया है। कंचन ने इस कार्य का श्रेय अपनी मास्टर ट्रेनर कविता को दिया है। उनका कहना है कि यदि हमें वह निशुल्क प्रशिक्षण न देती, तो अभी भी हम अपने घरेलू कार्य में ही व्यस्त रहतीं। साथ जुड़ी अन्य महिलाओं में सरला देवी, सुलोचना देवी, शारदा, मोनिका, तृप्ता तथा प्रवीण का कहना है कि जंगलों में यह घास पहले भी होती थी परंतु हमें कभी भी ऐसा विचार नहीं आया।
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महिलाओं के अंदर मेहनत का जज्बा और काम करने की लगन हो तो बगड़ घास से प्रतिमाह जितना चाहे, उतना पैसा कमा सकती हैं। क्योंकि यह मेहनत और बारीकी का काम है। मैंने महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिया है तथा आज घर बैठे ही वह अपना खर्च निकाल रही हैं जिससे मुझे अत्यंत खुशी होती है।
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-कविता, मास्टर ट्रेनर बंगाणा
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