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Una News: मिड-डे मील कर्मियों को समय पर नहीं मिल रहा मानदेय
Sun, 19 Jul 2026 12:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 19 Jul 2026 12:49 AM IST
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नारी (ऊना)। मिड-डे मील कर्मियों को समय पर मानदेय न मिलने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मिड-डे मील कर्मियों की मांग है कि उन्हें मानदेय हर माह समय पर दिया जाए और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। कर्मियों का कहना है कि वर्ष 2002 से कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को स्कूलों में दोपहर का भोजन सरकार द्वारा दिया जा रहा है और समय-समय पर इसमें कई परिवर्तन भी किए जा रहे हैं।
कर्मियों में मीना देवी, छोटू राम, आशा देवी, सुशील और रामदेवी का कहना है कि हमें छुट्टियों का वेतन नहीं दिया जाता। यहां तक कि यदि 10 दिन भी स्कूल बंद रहें तो उसका भी वेतन नहीं मिलता। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 500 रुपये मानेदय में बढ़ोतरी की गई थी, जो अप्रैल महीने से मिलना था लेकिन लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक नहीं मिला है। राज्य सरकार की तरफ से 3500 रुपये दो या तीन महीने के बाद खाते में पड़ते हैं परंतु केंद्र सरकार की ओर से पड़ने वाले 1000 रुपये लगभग पांच या छह महीने के बाद ही हमारे खाते में आते हैं। इससे हमारी रोटी रोजी चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त 25 बच्चों के पीछे एक मिड-डे मील वर्कर रखा हुआ है, जहां संख्या 100 है, वहां चार कर्मी की बजाय तीन कर्मी रखे हुए हैं।
मिड-डे मील वर्कर एसोसिएशन की जिला प्रधान बलविंद्र कौर ने भी इन मांगों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा मिड-डे मील कर्मियों के लिए एक ठोस नीति बनाकर इन्हें सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। साथ ही कर्मियों को 10 माह की बजाय 12 माह का वेतन दिया जाए।
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कर्मियों में मीना देवी, छोटू राम, आशा देवी, सुशील और रामदेवी का कहना है कि हमें छुट्टियों का वेतन नहीं दिया जाता। यहां तक कि यदि 10 दिन भी स्कूल बंद रहें तो उसका भी वेतन नहीं मिलता। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 500 रुपये मानेदय में बढ़ोतरी की गई थी, जो अप्रैल महीने से मिलना था लेकिन लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक नहीं मिला है। राज्य सरकार की तरफ से 3500 रुपये दो या तीन महीने के बाद खाते में पड़ते हैं परंतु केंद्र सरकार की ओर से पड़ने वाले 1000 रुपये लगभग पांच या छह महीने के बाद ही हमारे खाते में आते हैं। इससे हमारी रोटी रोजी चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त 25 बच्चों के पीछे एक मिड-डे मील वर्कर रखा हुआ है, जहां संख्या 100 है, वहां चार कर्मी की बजाय तीन कर्मी रखे हुए हैं।
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मिड-डे मील वर्कर एसोसिएशन की जिला प्रधान बलविंद्र कौर ने भी इन मांगों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा मिड-डे मील कर्मियों के लिए एक ठोस नीति बनाकर इन्हें सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। साथ ही कर्मियों को 10 माह की बजाय 12 माह का वेतन दिया जाए।
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