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Una News: औने-पौने दाम पर लुट रही प्रदेश की वन संपदा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 02 Mar 2026 04:52 AM IST
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चोर रास्ते बने वन काटुओं की पसंद, सुरंगद्वारी, नंगल जरियाला और ढोलवाह में वन माफिया सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। प्रदेश में लकड़ी कटान पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद लकड़ी की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही। वन माफिया ने अब मुख्य सड़कों और स्थायी नाकों से बचने के लिए सुरंगद्वारी, नंगल जरियाला और ढोलवाह जैसे इलाकों के संपर्क मार्गों और चोर रास्तों को तस्करी का रास्ता बना लिया है। इन्हीं दुर्गम मार्गों से लकड़ी को रात के समय बाहर निकालकर सीधे पंजाब के होशियारपुर पहुंचाया जा रहा था, जहां हिमाचल की बहुमूल्य वन संपदा को औने-पौने दामों पर बेच दिया जाता है।
वन विभाग की हालिया कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। एक साथ 14 लकड़ी से लदी गाड़ियों की धरपकड़ से यह साफ हो गया है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि संगठित और सुनियोजित तस्करी है। इससे पहले आमतौर पर एक-दो गाड़ियां ही पकड़ी जाती थीं, लेकिन इस बार की कार्रवाई ने वन माफिया को बड़ा झटका दिया है।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार तस्कर सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि संवेदनशील संपर्क मार्गों पर रात्रि गश्त, मोबाइल नाके और खुफिया निगरानी और तेज की जाएगी। यह कार्रवाई न सिर्फ तस्करी पर रोक लगाने की दिशा में अहम है, बल्कि भविष्य में वन माफिया के मंसूबों पर भी करारा प्रहार मानी जा रही है।
वन विभाग के डिप्टी रेंजर संजीव बीटन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लकड़ी कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, इसके बावजूद चोर रास्तों से लकड़ी की तस्करी की जा रही थी। एक साथ 14 गाड़ियों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि तस्करी एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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दौलतपुर चौक (ऊना)। प्रदेश में लकड़ी कटान पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद लकड़ी की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही। वन माफिया ने अब मुख्य सड़कों और स्थायी नाकों से बचने के लिए सुरंगद्वारी, नंगल जरियाला और ढोलवाह जैसे इलाकों के संपर्क मार्गों और चोर रास्तों को तस्करी का रास्ता बना लिया है। इन्हीं दुर्गम मार्गों से लकड़ी को रात के समय बाहर निकालकर सीधे पंजाब के होशियारपुर पहुंचाया जा रहा था, जहां हिमाचल की बहुमूल्य वन संपदा को औने-पौने दामों पर बेच दिया जाता है।
वन विभाग की हालिया कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। एक साथ 14 लकड़ी से लदी गाड़ियों की धरपकड़ से यह साफ हो गया है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि संगठित और सुनियोजित तस्करी है। इससे पहले आमतौर पर एक-दो गाड़ियां ही पकड़ी जाती थीं, लेकिन इस बार की कार्रवाई ने वन माफिया को बड़ा झटका दिया है।
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वन विभाग के सूत्रों के अनुसार तस्कर सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि संवेदनशील संपर्क मार्गों पर रात्रि गश्त, मोबाइल नाके और खुफिया निगरानी और तेज की जाएगी। यह कार्रवाई न सिर्फ तस्करी पर रोक लगाने की दिशा में अहम है, बल्कि भविष्य में वन माफिया के मंसूबों पर भी करारा प्रहार मानी जा रही है।
वन विभाग के डिप्टी रेंजर संजीव बीटन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लकड़ी कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, इसके बावजूद चोर रास्तों से लकड़ी की तस्करी की जा रही थी। एक साथ 14 गाड़ियों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि तस्करी एक संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।