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कोल्हापुर पॉक्सो केस: 'संवेदनशील मामले में ठीक से नहीं की जांच', कोर्ट ने पुलिस पर उठाए सवाल, CID करे जांच

Mon, 20 Jul 2026 05:14 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 20 Jul 2026 05:14 PM IST
सार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोल्हापुर के आश्रम स्कूल में नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न मामले की पुलिस जांच को बेहद लापरवाह बताते हुए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पॉक्सो कानून की अनदेखी पर नाराजगी जताई, जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी।

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Kolhapur POCSO caseCourt questions police over 'improper investigation in sensitive matter; orders CID probe.
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोल्हापुर के एक आश्रम स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षक द्वारा 2025 में एक नाबालिग लड़की के साथ किए गए यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की घटिया जांच की कड़ी निंदा की। वहीं, मामले की जांच महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी।

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कोर्ट ने कड़ी निंदा की
न्यायमूर्ति वृषाली जोशी और संदेश पाटिल की अध्यक्षता वाली कोल्हापुर सर्किट बेंच ने कहा कि पुलिस अधीक्षक के इस दावे से वे हैरान हैं कि कोई महिला आईपीएस अधिकारी उपलब्ध नहीं थी। जांच टीम के लापरवाह रवैये और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की पूर्ण अज्ञानता की कड़ी निंदा की। 13 जुलाई को पारित आदेश की एक प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।

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क्या है पूरा मामला? 
पीड़ित के माता-पिता ने पुलिस की अनुचित जांच का आरोप लगाते हुए जांच को एक स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। शिकायत के अनुसार, आश्रम स्कूल के प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक ने नाबालिग पीड़िता को अनुचित तरीके से छुआ और उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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कोर्ट ने क्या कहा? 
अदालत ने पुलिस द्वारा केस डायरी को बनाए रखने के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया। यह देखते हुए कि इसमें केवल कागज की कुछ ढीली शीटें ही शामिल थीं। पीठ ने कहा, 'हम जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये और कानून के प्रावधानों, विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम के बारे में उनकी पूर्ण अज्ञानता से स्तब्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।

कारण बताओ नोटिस जारी किया गया
अदालत ने एसपी को तलब किया, जिन्होंने बताया कि जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।  अब जांच एक वरिष्ठ महिला पुलिस निरीक्षक को सौंप दी जाएगी। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच करने के लिए आईपीएस रैंक की कोई महिला पुलिस अधिकारी उपलब्ध नहीं थी। अदालत ने कहा। 'यह बेहद चिंताजनक है। पुलिस अधीक्षक के जवाब ने हमें स्तब्ध कर दिया है। 


मामले की जांच घटिया तरीके से की गई थी। इस बात पर ध्यान देते हुए अदालत ने भविष्य की जांच की प्रकृति और गुणवत्ता के बारे में आशंका व्यक्त की। पीठ ने कहा, 'हम संतुष्ट हैं कि यह मामला अदालत के लिए पूर्ण न्याय करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए उपयुक्त है'। यह मानते हुए कि अपराध जघन्य प्रकृति का था। अदालत ने जांच को राज्य के सीआईडी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया और एजेंसी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करने के लिए कहा।

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